हे माँ… हे माँ… हे माँ…
तरस रही हैं आँखें मेरी, माँ दिखा दे दीदार,
पर्वत की रानी, त्रिकुटा भवानी, सुन ले मेरी पुकार,
मैया… अपनी चौखट पे बुला ले एक बार।
दुनिया के झूठे रिश्तों ने, मुझको बहुत रुलाया है,
हार के अपनी किस्मत से, सर तेरे दर पे झुकाया है।
बाण गंगा का शीतल जल, तन-मन पावन कर जाए,
तेरा इक दर्शन मिल जाए, तो सोई किस्मत जग जाए।
मेरी डूब रही है नैया, माँ थाम ले पतवार,
मैया… अपनी चौखट पे बुला ले एक बार।
अंधियारी उस गुफा के अंदर, ज्योत तेरी जलती है,
तेरे ही दम से ओ मैया, ये दुनिया सारी चलती है।
मैं बालक हूँ नादान बड़ा, तू ममता की मूरत है,
मुझे और किसी की चाह नहीं, बस तेरी ही ज़रूरत है।
मेरी सूनी बगिया में भी, भर दे खुशियाँ अपार,
मैया… अपनी चौखट पे बुला ले एक बार।
लाल चुनरिया, लाल चूड़ियाँ, भवन तेरा सजता है,
भक्तों की टोली में मैया, जयकारा गूंजता है।
पाँव में पड़ें भले ही छाले, चढ़ाई चढ़ता आऊंगा,
तू एक बार आवाज़ तो दे, मैं दौड़ के तेरे पास आऊंगा।
रख ले सेवादार बना के, कर दे बेड़ा पार,
मैया… अपनी चौखट पे बुला ले एक बार।
जय माता दी… जय माता दी…
कहते जाएँ, बढ़ते जाएँ।
जय माता दी… जय माता दी…
मैया अपनी चौखट पे बुला ले एक बार।
अपनी चौखट पर बुला ले एक बार – माता रानी का भजन
अपनी चौखट पर बुला ले एक बार” एक भावपूर्ण माता वैष्णो देवी भजन है, जिसमें भक्त की तड़प, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण झलकता है। यह भजन माँ त्रिकुटा भवानी से दर्शन की प्रार्थना, जीवन की नैया पार लगाने और अपनी शरण में स्थान देने की करुण पुकार है।
“अपनी चौखट पर बुला ले एक बार” भजन एक सच्चे भक्त के हृदय की गहराइयों से निकली हुई विनती है। इसमें भक्त संसार के झूठे रिश्तों से मिले दुख, टूटी हुई आशाओं और जीवन की कठिन राहों के बीच माँ वैष्णो देवी की शरण में आने की लालसा प्रकट करता है। यह भजन बताता है कि जब हर सहारा छूट जाता है, तब माँ की चौखट ही सबसे बड़ा आधार बनती है।
भजन में बाणगंगा, त्रिकुटा पर्वत, गुफा में जलती ज्योत और जयकारों का सुंदर चित्रण है, जो भक्त को वैष्णो देवी धाम की आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ देता है। यह रचना आस्था, विश्वास और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है।
यह भजन हर उस भक्त की भावना को व्यक्त करता है, जो माँ वैष्णो देवी के दर्शन की कामना करता है और मानता है कि एक बार माँ ने बुला लिया, तो जीवन के सारे दुख स्वतः ही दूर हो जाते हैं। 🙏 जय माता दी।


