प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी भजन के बोल (Lyrics – Hindi)
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी ।
तैसी भांति प्यारी जू के, जीवन बिहारी है ॥
जोई-जोई भावै उन्हैं, सोई-सोई रुचै इन्हैं ।
एकै गति भई ऐसी, रंच को न न्यारी है ॥
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी ।
तैसी भांति प्यारी जू के, जीवन बिहारी है ॥
छिन-छिन देखि-देखि, छबि की तरंग नाना ।
प्रीतम दुहूँनि सुधि, देह की बिसारी है ॥
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी ।
तैसी भांति प्यारी जू के, जीवन बिहारी है ॥
हित ध्रुव रीझि-रीझि, रहै रति रस भीज ।
प्रीति ऐसी अब लगि, सुनी न निहारी है ॥
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी ।
तैसी भांति प्यारी जू के, जीवन बिहारी है ॥
प्रेम के खिलौना दोऊ, खेलत है प्रेम खेल ।
प्रेम फूल फुलन सों, प्रेम सेज रचि है ॥
प्रेम ही की चितवन, मुस्कान प्रेम ही की ।
प्रेम रंगी बात करें, प्रेम कैली मची है ॥
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी ।
तैसी भांति प्यारी जू के, जीवन बिहारी है ॥
प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी भजन राधा-कृष्ण के उस दिव्य प्रेम को दर्शाता है, जहाँ दोनों की रुचि, भावना, गति और चेतना एक ही हो जाती है। क्षण-क्षण एक-दूसरे की छवि में खो जाना, देह की सुधि भूल जाना और प्रेम रस में पूर्णतः डूब जाना—यही इस भजन का मूल भाव है।
इस भजन में न भौतिक कामना है, न किसी और लक्ष्य की चाह—केवल प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही सेज है, प्रेम ही मुस्कान और प्रेम ही संवाद। यही निष्काम, निश्छल प्रेम इस भजन को अत्यंत विशिष्ट और आध्यात्मिक बनाता है।
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प्यारे जू की जीवन है, नवल किशोरी गोरी भजन से जुड़ी विशेष जानकारी
श्रेणी: कृष्ण भजन
भाव: माधुर्य रस, राधा-कृष्ण प्रेम, एकात्म भक्ति
मुख्य विषय: प्रेम ही जीवन, प्रेम ही साधना
रचनाकार/प्रस्तुति: बाबा धसका पागल, पानीपत
यह कृष्ण भजन राधा-कृष्ण के उस अलौकिक प्रेम का चित्रण है, जहाँ दो शरीर होते हुए भी भावना, चेतना और जीवन एक ही होता है। यह भजन सुनने वाले के हृदय में प्रेम, तन्मयता और भक्ति का गहरा अनुभव कराता है। 🙏 जय श्री राधे कृष्ण




















