माता वैष्णो देवी का प्रसिद्ध भजन ‘सज रही मेरी अम्बे मैया’ के हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स यहाँ पढ़ें। साथ ही इस भजन का अर्थ, महत्व और श्रीधर की पौराणिक कथा जानें।

सज रही मेरी अम्बे मैया भजन लिरिक्स

माता वैष्णो देवी का प्रसिद्ध भजन ‘सज रही मेरी अम्बे मैया’ के हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स यहाँ पढ़ें। साथ ही इस भजन का अर्थ, महत्व और श्रीधर की पौराणिक कथा जानें।

सज रही मेरी अम्बे मैया – माता रानी भजन लिरिक्स – इस ब्लॉग में माँ वैष्णो देवी का अत्यंत प्रिय और भावपूर्ण भजन ‘सज रही मेरी अम्बे मैया’ के संपूर्ण हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स प्रस्तुत किए गए हैं। पाठकों की भक्ति और सुविधा के लिए हमने इस भजन की प्रत्येक पंक्ति का सरल अर्थ, भजन के गायन का आध्यात्मिक महत्व और इसे जपने के सही समय के बारे में विस्तार से बताया है, जिससे आप माँ की दिव्य कथा और श्रीधर की अनन्य भक्ति का आनंद ले सकें।

सज रही मेरी अम्बे मैया भजन लिरिक्स

विवरण जानकारी
भजन शीर्षक सज रही मेरी अम्बे मैया
भजन रचयिता पारंपरिक (विभिन्न स्रोतों के अनुसार)
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सज रही मेरी अम्बे मैया भजन लिरिक्स

हिंदी लिरिक्स

सज रही मेरी अम्बे मैया, सुनहरी गोटे में ।

सुनहरी गोटे में, सुनहरी गोटे में,

सुनहरी गोटे में, रूपहरी गोटे में ॥

मैया तेरी चुनरी की गजब है बात,

चंदा जैसा मुखड़ा मेहंदी से रचे हाथ,

॥ सज रही मेरी अम्बे मैया…॥

मैया के प्यारे, श्रीधर बेचारे, करते वो निर्धन, नित कन्या पूजन,

माँ प्रसन्न हो उन पर, आई कन्या बनकर,

उनके घर आई, ये हुक्म सुनाई,

कल अपने घर पर रखो विशाल भंडारा,

कराओ सबको भोजन बुलाओ गाँव सारा,

॥ सज रही मेरी अम्बे मैया..॥

माँ का संदेसा, हाँ जी, घर घर में पहुंचा, हाँ जी

करने को भोजन, हाँ जी, आ गए सब ब्राम्हण, हाँ जी

भैरव भी आया, हाँ जी, सब चेलों को लाया, हाँ जी

श्रीधर घबराये, हाँ जी, कुछ समझ ना पाए, हाँ जी

फिर कन्या आई, हाँ जी, उन्हें धीर बंधाई, हाँ जी

वो दिव्य शक्ति, हाँ जी, श्रीधर से बोली, हाँ जी

तुम मत घबराओ, हाँ जी, अब बहार आओ, हाँ जी

सब अतिथि अपने, हाँ जी, कुटिया में लाओ, हाँ जी

श्रीधर जी बोले, हाँ जी, फिर बहार आकर, हाँ जी

सब भोजन करले, हाँ जी, कुटिया में चलकर, हाँ जी

फिर भैरव बोले, हाँ जी, मै और मेरे चेले, हाँ जी

कुटिया में तेरी, हाँ जी, बैठेंगे कैसे, हाँ जी

बोले फिर श्रीधर, हाँ जी, तुम चलो तो अंदर, हाँ जी

अस्थान की चिंता, हाँ जी, तुम छोड़ दो मुझपर, हाँ जी

तब लगा के आसन, हाँ जी, बैठे सब ब्राम्हण, हाँ जी

कुटिया के अंदर, हाँ जी, करने को भोजन, हाँ जी

भंडारे का आयोजन श्रीधर जी से करवाया,

फिर सबको पेट भरकर भोजन तूने करवाया,

मैया तेरी माया क्या समझेगा कोई,

जो भी तुझे पूजे नसीबो वाला होय,

॥ सज रही मेरी अम्बे मैया..॥

सुनले ऐ ब्राम्हण, हाँ जी, ये वैष्णव भोजन, हाँ जी

ब्राम्हण जो खाते, हाँ जी, वही तुझे खिलाते, हाँ जी

हट की जो तूने, हाँ जी, बड़ा पाप लगेगा, हाँ जी

यहाँ मॉस और मदिरा, हाँ जी, नहीं तुझे मिलेगा, हाँ जी

ये वैष्णो भंडारा तू मान ले मेरा कहना,

ब्राम्हण को मॉस मदिरा से क्या लेना देना,

॥ सज रही मेरी अम्बे मैया..॥

भैरव ना छोड़ा, हाँ जी, मैया का पीछा, हाँ जी

माँ गुफा के अंदर, हाँ जी, जब छुप गई जाकर, हाँ जी

जब गर्भ गुफा में, हाँ जी, भैरव जाता था, हाँ जी

पहरे पर बैठे, हाँ जी, लंगूर ने रोका, हाँ जी

अड़ गया था भैरव, हाँ जी, जब अपनी जिद पर, हाँ जी

लांगुर भैरव में, हाँ जी, हुआ युद्ध भयंकर, हाँ जी

फिर आदि शक्ति, हाँ जी, बनकर रणचंडी, हाँ जी

जब गर्भ गुफा से, हाँ जी, थी बाहर निकली, हाँ जी

वो रूप बनाया, हाँ जी, भैरव घबराया, हाँ जी

तलवार इक मारी, हाँ जी, भैरव संहारी, हाँ जी

भैरव के तन से, हाँ जी, आवाज ये आई, हाँ जी

हे आदि शक्ति, हाँ जी, हे चण्डी माई, हाँ जी

मुझ पर कृपा कर, हाँ जी, मेरा दोष भुलाकर, हाँ जी

मुझे कोई वर दे, हाँ जी, ये करूणा कर दे, हाँ जी

मैं हूँ अपराधी, हाँ जी, तेरी भक्ति साधी, हाँ जी

मेरा दोष मिटा दे, हाँ जी, निर्दोष बना दे, हाँ जी

भैरव शरणागत आया तो बोली वैष्णव माता,

मेरी पूजा के बाद में होगी तेरी भी पूजा,

मैया के दर्शन कर जो भैरव मंदिर में जाए,

मैया की कृपा से वो मन चाहा वर पाए,

॥ सज रही मेरी अम्बे मैया..॥

English Lyrics

Saj rahi meri Ambe Maiya, sunhare gote mein.

Sunhare gote mein, sunhare gote mein,

Sunhare gote mein, rupahari gote mein.

Maiya teri chunari ki gajab hai baat,

Chanda jaisa mukhada mehndi se rache haath.

|| Saj rahi meri Ambe Maiya… ||

Maiya ke pyare, Shridhar bechare, karte wo nirdhan, nit kanya pujan,

Maa prasann ho un par, aayi kanya bankar,

Unke ghar aayi, ye hukm sunayi,

Kal apne ghar par rakho vishal bhandara,

Karao sabko bhojan bulao gaon saara.

|| Saj rahi meri Ambe Maiya… ||

Maa ka sandesa, Haan ji, ghar ghar mein pahuncha, Haan ji

Karne ko bhojan, Haan ji, aa gaye sab Brahman, Haan ji

Bhairav bhi aaya, Haan ji, sab chelo ko laya, Haan ji

Shridhar ghabraye, Haan ji, kuch samajh na paaye, Haan ji

Phir kanya aayi, Haan ji, unhe dheer bandhayi, Haan ji

Wo divya shakti, Haan ji, Shridhar se boli, Haan ji

Tum mat ghabrao, Haan ji, ab bahar aao, Haan ji

Sab atithi apne, Haan ji, kutiya mein lao, Haan ji

Shridhar ji bole, Haan ji, phir bahar aakar, Haan ji

Sab bhojan karle, Haan ji, kutiya mein chalkar, Haan ji

Phir Bhairav bole, Haan ji, mai aur mere chele, Haan ji

Kutiya mein teri, Haan ji, baithenge kaise, Haan ji

Bole phir Shridhar, Haan ji, tum chalo to andar, Haan ji

Asthan ki chinta, Haan ji, tum chhod do mujhpar, Haan ji

Tab laga ke aasan, Haan ji, baithe sab Brahman, Haan ji

Kutiya ke andar, Haan ji, karne ko bhojan, Haan ji

Bhandare ka aayojan Shridhar ji se karwaya,

Phir sabko pet bharkar bhojan tune karwaya,

Maiya teri maya kya samjhega koi,

Jo bhi tujhe pooje nasibo wala hoye.

|| Saj rahi meri Ambe Maiya… ||

Sunle ae Brahman, Haan ji, ye Vaishnav bhojan, Haan ji

Brahman jo khate, Haan ji, wahi tujhe khilate, Haan ji

Hat ki jo tune, Haan ji, bada paap lagega, Haan ji

Yahan maas aur madira, Haan ji, nahi tujhe milega, Haan ji

Ye Vaishno bhandara tu maan le mera kehna,

Brahman ko maas madira se kya lena dena.

|| Saj rahi meri Ambe Maiya… ||

Bhairav na chhoda, Haan ji, Maiya ka pichha, Haan ji

Maa gufa ke andar, Haan ji, jab chhup gayi jaakar, Haan ji

Jab Garbh Gufa mein, Haan ji, Bhairav jaata tha, Haan ji

Pehre par baithe, Haan ji, Langur ne roka, Haan ji

Ad gaya tha Bhairav, Haan ji, jab apni jid par, Haan ji

Langur Bhairav mein, Haan ji, hua yuddh bhayankar, Haan ji

Phir Aadi Shakti, Haan ji, bankar Ranchandi, Haan ji

Jab Garbh Gufa se, Haan ji, thi bahar nikali, Haan ji

Wo roop banaya, Haan ji, Bhairav ghabraya, Haan ji

Talwar ik maari, Haan ji, Bhairav sanhari, Haan ji

Bhairav ke tan se, Haan ji, aawaz ye aayi, Haan ji

He Aadi Shakti, Haan ji, He Chandi Maai, Haan ji

Mujh par kripa kar, Haan ji, mera dosh bhulakar, Haan ji

Mujhe koi var de, Haan ji, ye karuna kar de, Haan ji

Main hoon aparadhi, Haan ji, teri bhakti saadhi, Haan ji

Mera dosh mita de, Haan ji, nirdosh bana de, Haan ji

Bhairav sharnagat aaya to boli Vaishno Mata,

Meri pooja ke baad mein hogi teri bhi pooja,

Maiya ke darshan kar jo Bhairav mandir mein jaaye,

Maiya ki kripa se wo man chaha var paaye.

|| Saj rahi meri Ambe Maiya… ||

भजन का पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ

  • सज रही मेरी अम्बे मैया…: मेरी माँ अम्बे सुनहरे गोटे वाली चुनरी पहनकर बहुत सुंदर सज रही हैं। उनके हाथ मेहंदी से रचे हैं और मुख चंद्रमा जैसा चमक रहा है।

  • मैया के प्यारे श्रीधर…: माँ के भक्त श्रीधर गरीब थे लेकिन नियम से कन्या पूजन करते थे। माँ ने कन्या रूप धरकर उन्हें दर्शन दिए और भंडारा करने का आदेश दिया।

  • माँ का संदेसा…: पूरे गाँव और ब्राह्मणों को न्योता दिया गया। अभिमानी भैरव भी अपने चेलों के साथ वहाँ आ पहुँचा।

  • श्रीधर घबराये…: छोटी सी कुटिया में इतने लोग कैसे आएँगे, यह सोचकर श्रीधर घबरा गए, तब कन्या रूपी माँ ने उन्हें धीरज बंधाया और सबको कुटिया के अंदर बुलाया।

  • अस्थान की चिंता…: माँ की माया से उस छोटी सी कुटिया में सभी अतिथि और भैरव के चेले आराम से बैठ गए और सबने भरपेट भोजन किया।

  • सुनले ऐ ब्राम्हण…: जब भैरव ने मांस-मदिरा की मांग की, तो माँ ने उसे समझाया कि यह सात्विक वैष्णव भंडारा है, यहाँ यह सब वर्जित है।

  • भैरव ना छोड़ा…: भैरव नहीं माना और माँ का पीछा करने लगा। माँ गुफा (अर्धकुंवारी) में जाकर छुप गईं जहाँ लंगूर (हनुमान जी) ने पहरा दिया।

  • हुआ युद्ध भयंकर…: जब भैरव जिद पर अड़ गया तो लंगूर और भैरव में युद्ध हुआ। अंत में माँ ने रणचंडी रूप धारण कर भैरव का वध कर दिया।

  • भैरव शरणागत…: मरते समय भैरव ने क्षमा मांगी। दयालु माँ ने उसे क्षमा किया और वरदान दिया कि जो भक्त मेरे दर्शन करेगा, उसकी यात्रा तभी पूरी होगी जब वह तुम्हारे (भैरव मंदिर) दर्शन करेगा।

सज रही मेरी अम्बे मैया महत्व

इस भजन का महत्व माता वैष्णो देवी की अपार महिमा और उनके भक्त श्रीधर की अटूट श्रद्धा को दर्शाना है। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान धन के नहीं बल्कि भाव के भूखे होते हैं। इसमें माँ के दयालु और संहारक दोनों रूपों का वर्णन है, जो भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाती हैं। यह भजन सुनने से मन में शांति और माता के प्रति अटूट विश्वास जागृत होता है।

सज रही मेरी अम्बे मैया लोग क्यों जपें

लोगों को इस भजन का गायन या जाप इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह माता वैष्णो देवी की पूरी कथा को सरल शब्दों में बयां करता है। इसे गाने से अहंकार (भैरव का प्रतीक) का नाश होता है और भक्ति (श्रीधर का प्रतीक) का उदय होता है। जो लोग जीवन में कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, उन्हें यह भजन मानसिक शक्ति प्रदान करता है और माँ का आशीर्वाद दिलाता है।

सज रही मेरी अम्बे मैया लोग कब जपें

इस भजन को जपने का सबसे उत्तम समय ‘नवरात्रि’ का पावन पर्व है। इसके अलावा, मंगलवार और शुक्रवार को माता रानी के दिन माना जाता है, इसलिए इन दिनों सुबह या शाम की आरती के समय इसे गाना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। जागरण, चौकी या माता के किसी भी धार्मिक आयोजन में इस भजन का विशेष महत्व है।

सज रही मेरी अम्बे मैया Video Song

डिस्क्लेमर: यहाँ दी गई सभी जानकारी अन्य वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री और हिंदू धर्म की मान्यताओं के आधार पर अपडेट की गई है। हम इसकी शत-प्रतिशत सटीकता का दावा नहीं करते हैं।

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