यह भजन “ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता” भगवान गणेश जी की महिमा का गान है, जिसमें उन्हें विघ्नहर्ता, लंबोदर, मोदकप्रिय और मूषक वाहन रूप में वर्णित किया गया है। भजन में गणेश जी के स्वरूप, उनकी सुंदरता, लाल सिंदूर से सजे स्वरूप और चार भुजाओं की अद्भुत छवि का उल्लेख है। यह भजन भक्तों को श्रद्धा और भक्ति से भर देता है तथा मन में सकारात्मकता का संचार करता है।
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता लिरिक्स
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता-२,
एकदंत कहते हैं तुझको -२,
ओ विघ्नों के हरता,
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता ।।
लंबोदर सुंदर मुख वाले-२,
मोदक का जो भोग लगावें -२,
मूषक सवारी करता,
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता ।।
मस्तिक लाल सिंदूर सजाया -२,
कंचन कंचन तेरी काया -२,
नैनों में सूर्य उभरता,
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता ।।
चारभुजा अति सुंदर लागे-२,
‘इंदु’ तेरा भजन सुनावे-२,
ओ सृष्टि के करता,
ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता ।।
लिरिक्स – इंदु समाना जी
लोगों को यह भजन पढ़ना और गाना चाहिए क्योंकि यह भक्ति और शांति का अनुभव कराता है, मन के विघ्न और बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है और जीवन में नई ऊर्जा लाता है। इस भजन का पाठ विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, पूजा-पाठ, नए कार्य की शुरुआत या दैनिक प्रार्थना के समय करना शुभ और मंगलकारी होता है।
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