तेरो खूब सज्यो श्रृंगार म्हानें प्यारो लागै: यह भजन खाटू श्याम बाबा (सांवरिया सेठ) को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भक्ति गीत है। इस भजन में भक्त अपने आराध्य श्याम बाबा के दिव्य श्रृंगार, उनकी सुंदरता, प्रेम और भक्ति का वर्णन करता है। यह गीत श्याम बाबा की सुंदर सूरत, सोने-चांदी के आभूषणों और उनके भव्य दरबार की अद्भुत झलक प्रस्तुत करता है। “तेरो खूब सज्यो श्रृंगार म्हानें प्यारो लागै” केवल एक भजन नहीं — यह भक्त और बाबा के बीच प्रेम का गीत है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि श्याम बाबा की सुंदरता केवल उनके रूप में नहीं, बल्कि उनके हृदय की करुणा में है। जब यह भजन गूंजता है, तो ऐसा लगता है मानो पूरा खाटू धाम उनके श्रृंगार के दिव्य प्रकाश में नहा रहा हो।
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार म्हानें प्यारो लागै लिरिक्स | Tero Khub Sajo Shringar Mhane Pyaro Lage Lyrics in Hindi
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार, म्हानें प्यारो लागै,
हे श्याम तेरो दरबार, म्हानें प्यारो लागै ।।
साँवली सलौनी सूरत, छवि मन भा रही,
तीखी-तीखी आँख्यां थारी, शोभा ने बढ़ा रही,
मेरो श्याम है सदा बहार, म्यानें प्यारो लागै,
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार, म्हानें प्यारो लागै ।।
सोवणो सो बागो तन पे, जँचा-जँचा पहरायो है,
सोना चाँदी हीरा मोती, मोकलो सजायो है,
फुलड़ा को एक-एक हार, म्हानें प्यारो लागै,
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार, म्हानें प्यारो लागै ।।
देख है तू भक्ता कानी, जादू सो चलावै है,
प्रीत की तू भर के चाबी, फेर तूं नचावै है,
तेरो बड़ो अनोखो प्यार, म्हानें प्यारो लागै,
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार, म्हानें प्यारो लागै ।।
खजानो लुटावे तू तो, बड़ो दिलदार है,
‘बिन्नू’ या ही जाने म्हारो, बाबो मजेदार है,
‘लक्खा’ की सुनै पुकार, म्हानें प्यारो लागै,
तेरो खूब सज्यो श्रृंगार, म्हानें प्यारो लागै ।।
लिरिक्स – बिन्नू जी
भजन का भावार्थ (Meaning in Hindi)
इस भजन में भक्त श्याम बाबा के अलौकिक सौंदर्य और श्रृंगार की प्रशंसा करता है।
भक्त भाव-विभोर होकर कहता है कि श्याम बाबा का श्रृंगार, उनका दरबार और उनकी सूरत सब कुछ उसे अत्यंत प्रिय लगता है।
बाबा का सोने-चांदी के आभूषणों से सुसज्जित रूप, उनकी मोहक मुस्कान और सांवली सूरत भक्ति के रस में डुबो देती है।
भक्त यह भी कहता है कि श्याम बाबा प्रेम से भरे हुए हैं और अपने भक्तों को कभी खाली नहीं लौटाते।
भजन का सार (Summary)
यह गीत श्याम बाबा की भक्ति और सौंदर्य दोनों का संगम है।
इसमें प्रेम, सौंदर्य, और दिव्यता का अद्भुत मेल है।
भक्त की दृष्टि में बाबा का हर श्रृंगार और हर आभूषण उनके अनंत सौंदर्य की झलक देता है।
भजन का सार यह है — “श्याम का श्रृंगार केवल बाहरी नहीं, बल्कि उनके प्रेम और करुणा का प्रतीक है।”
क्यों गाया जाता है यह भजन
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बाबा श्याम के श्रृंगार दर्शन या विशेष भक्ति पर्वों पर।
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जब भक्त बाबा के प्रति अपनी भावनाएँ और प्रेम व्यक्त करना चाहता है।
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खाटू धाम या घर में आयोजित भजन संध्या या आरती कार्यक्रम में।
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जब मन शांति और स्नेह से भरा हो।
कब गाना चाहिए
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खाटू श्याम जी के श्रृंगार दर्शन के समय।
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नित्य पूजा या आरती के बाद।
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भक्ति संध्या या कीर्तन कार्यक्रमों में।
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विशेष अवसरों जैसे फाल्गुन मेला, एकादशी, या जन्मोत्सव पर।
आध्यात्मिक संदेश
“सच्ची भक्ति में सौंदर्य का अनुभव आत्मा के भीतर होता है।
श्याम बाबा का श्रृंगार हमें यह सिखाता है कि दिव्यता केवल रूप में नहीं, बल्कि प्रेम और करुणा में बसती है।”
FAQs – तेरो खूब सज्यो श्रृंगार म्हानें प्यारो लागै भजन से जुड़े प्रश्न
Q1. यह भजन कब गाना शुभ माना जाता है?
बाबा श्याम के श्रृंगार दर्शन, विशेष पूजा, या फाल्गुन मेला के अवसर पर।
Q2. क्या यह भजन केवल मंदिर में ही गाया जा सकता है?
नहीं, इसे घर, सत्संग या किसी भी भक्ति सभा में गाया जा सकता है।
Q3. इस भजन का भाव भक्त क्या समझे?
कि श्याम बाबा का श्रृंगार प्रेम, भक्ति और करुणा का प्रतीक है।
Q4. क्या यह भजन नृत्य या कीर्तन के साथ गाया जा सकता है?
हाँ, यह भजन अत्यंत मधुर है और कीर्तन शैली में गाने पर भक्तिमय वातावरण बना देता है।





















