यह सुंदर भजन “चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे” खाटू श्याम जी की भक्ति और उनके दर्शन के महत्व का गीत है। इसमें भक्त अपने साथी और अन्य श्रद्धालुओं को खाटू धाम में दर्शन करने के लिए आमंत्रित करता है और बताता है कि श्याम बाबा का मंदिर बैठने मात्र से ही सारे दुःख, व्यस्तताएँ और चिंताएँ हल हो जाती हैं। हे साथी! चलो खाटू धाम में श्याम बाबा के दर्शन करने। वहां बैठकर तुम अपने मन की सारी बातें कह सकते हो और जीवन की सभी व्यस्तताएँ और दुःख हल हो जाएंगे। श्यामजी अपने भक्तों के साथ हँसते-खेलते रहते हैं और उनके दर्शन मात्र से जीवन में सुख, संतोष और प्रेम का अनुभव होता है। इस भजन को गाते समय भक्त को खाटू श्याम जी के सान्निध्य का अनुभव होता है और मन प्रफुल्लित और शांत हो जाता है।
चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे लिरिक्स
चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे,
झाला देवे मंदिर में बैठ्यो श्याम रे,
ओ मनड़ो लागे ना होवे कोई काम रे,
झाला देवे मंदिर में बैठ्यो श्याम रे ।।
बाबो म्हारो डीक रह्यो बाट सबकी,
याद सतावे नहीं बात बस की,
बातां करसी तन मन की सागे श्याम रे,
झाला देवे मंदिर में बैठ्यो श्याम रे ।।
साँवरो मिलेगो म्हासूं हँस हँस के,
कालजे लगासी वो तो कस कस के,
फेरूँ दुःख को जीवन में काई काम रे,
झाला देवे मंदिर में बैठ्यो श्याम रे ।।
साँवरे से रिश्तो बना के देख ले,
कोणी गयो खाटू तो जाके देख ले,
‘अन्नू’ गूँजे दुनियां में आंको नाम रे,
झाला देवे मंदिर में बैठ्यो श्याम रे ।।
लिरिक्स – श्री अनूप जी शर्मा (अन्नू जी)
चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे भजन का भाव
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भजन में खाटू धाम की पवित्रता और श्यामजी के सान्निध्य का वर्णन है।
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भक्त कहता है कि जब श्याम बाबा के दर्शन होते हैं, तो मन को शांति और जीवन की समस्याओं का समाधान मिल जाता है।
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श्याम जी के सान्निध्य में बैठकर भक्त अपने तन-मन की बात साझा करता है और दुःखों से मुक्ति पाता है।
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भजन में यह भी कहा गया है कि श्याम जी के साथ संबंध बनाने से जीवन में सुख और खुशी आती है।
क्यों गाया जाता है यह भजन – चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे
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खाटू श्याम जी के प्रति भक्ति और श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए।
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जीवन की चिंताओं, दुःख और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए।
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भक्तों को प्रेरित करने के लिए कि वे श्री श्याम जी के मंदिर का दर्शन करें और भक्ति का अनुभव लें।
कब गाएं – चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे
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खाटू श्याम जी के मंदिर दर्शन या यात्रा के दौरान।
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संकीर्तन, भजन मंडली और धार्मिक समारोहों में।
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जब भक्त मन को शांति और श्यामजी की कृपा अनुभव करना चाहता हो।
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