देवा लंबोदर गिरिजा नंदना लिरिक्स (Deva Lambodar Girija Nandna Lyrics in Hindi)

यह सुंदर गणेश वंदना/आरती है – “देवा लंबोदर गिरिजा नंदना”, जिसमें भक्त गणपति बप्पा से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और विघ्नों के नाश की प्रार्थना करता है।

देवा लंबोदर गिरिजा नंदना लिरिक्स (Deva Lambodar Girija Nandna Lyrics in Hindi)

देवा लंबोदर गिरिजा नंदना लिरिक्स हिन्दी में:

देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(1) हे मनभावन अति सुख पावन -२,
विघ्न विनाशक गजानना -२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(2) देवों में तुम देव गजानन -२,
देव करें तेरी वंदना -२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(3) गौरी के तुम पुत्र गजानन -२,
शंकर के तुम नंदना-२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(4) तू सुखकर्ता तू दुखहर्ता -२,
काटो यम के बंधना -२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(5) रुनझुन रुनझुन पैजनि बाजे -२,
चलत मस्त मुचकंदना -२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

(6) जो कोई देवा तेरी आरती गावे,
(आरती गावे देवा तुमको मनावे, तुमको मनावे देवा शरण में आवे,
शरण में आवे देवा दर्शन पावे, दर्शन पावे देवा भोग लगावे)
काटो यम के बंधना -२,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना,
देवा पूर्ण करो मनकामना, हो देवा सिद्ध करो मनकामना,
देवा लंबोदर गिरिजा नंदना ।।

भजन/आरती का भावार्थ

  • मुखड़ा (देवा लंबोदर गिरिजा नंदना…)
    हे लंबोदर, गिरिजा नंदन गणेश जी! आप मेरी मनोकामनाओं को पूर्ण करें और मेरी सिद्धि का मार्ग प्रशस्त करें।

  • (1) हे मनभावन अति सुख पावन…
    हे मन को भाने वाले, परम सुखदायक, विघ्न विनाशक गजानन! आपकी कृपा से भक्तों का जीवन मंगलमय होता है।

  • (2) देवों में तुम देव गजानन…
    आप देवताओं में भी श्रेष्ठ देव हैं। सभी देवता आपकी वंदना और स्तुति करते हैं।

  • (3) गौरी के तुम पुत्र गजानन…
    आप माँ गौरी और महादेव के पुत्र हैं, अतः त्रिलोक आपमें अपनी शक्ति का स्रोत पाते हैं।

  • (4) तू सुखकर्ता तू दुखहर्ता…
    हे गणेश! आप ही सुख देने वाले और दुख दूर करने वाले हैं। आप यमराज के बंधनों को काटकर भक्तों को मुक्त करते हैं।

  • (5) रुनझुन रुनझुन पैजनि बाजे…
    आपके चलते समय पायल की मधुर ध्वनि सुनाई देती है और आप मस्त होकर चलते हैं। यह दृश्य भक्तों के हृदय को आनंदित करता है।

  • (6) जो कोई देवा तेरी आरती गावे…
    जो भी भक्त आपकी आरती करता है, आपकी शरण में आता है और आपको भोग अर्पित करता है, उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं और यमबंधन कट जाते हैं।

क्यों गाया जाता है

  • विघ्नों का नाश और कार्य सिद्धि के लिए।

  • नए कार्य, शुभ अवसर, विवाह, गृहप्रवेश, परीक्षा आदि के आरंभ में।

  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए।

यह भजन/आरती आमतौर पर गणेश चतुर्थी, विशेष पूजा, संकीर्तन या दैनिक आरती में गाया जाता है।

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