यह भजन “गजानन अलबेली सरकार, गौरी नन्दन शिवसुत प्यारे, है मूसे असवार” भगवान गणेश जी की स्तुति में रचा गया है। इसमें गणपति बप्पा को ऋद्धि-सिद्धि और शुभ लाभ के दाता, बल-बुद्धि-विद्या के प्रदाता तथा विघ्नहर्ता के रूप में याद किया गया है।

गजानन अलबेली सरकार लिरिक्स
गजानन अलबेली सरकार,
गौरी नन्दन शिवसुत प्यारे, है मूसे असवार ।। टेर।।
तर्ज – कि नैया ले चल परली पार ।
ऋद्धि-सिद्धि शुभ लाभ के दाता,
बल बुद्धि विद्या के प्रदाता, प्रथम पूज्य हैं भाग्य विधाता,
जो जन तुमको प्रथम मनाये, होती जय जयकार।। गजानन .. ।।१।।
सुबह शाम तेरे गुण गाये,
हाथ जोड़ कर शीश नवाये, विघ्न ओ बाधा आ नहीं पाये,
अणिमांदिक सिद्धि पाता वो, भरा रहे भण्डार।। गजानन .. ।। २ ।।
‘मित्र मंडल’ के सेवक सारे,
करते मिल गुणगान तुम्हारे, पूरे कर अरमान हमारे,
आन विराजो हृदय कमल पे, ‘सांवर’ करे पुकार।। गजानन .. ।। ३ ।।
लिरिक्स – सांवर जी
क्यों पढ़ें यह भजन
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इस भजन का पाठ करने से जीवन में आने वाली विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
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गणेश जी की कृपा से बुद्धि, बल, विद्या और सफलता प्राप्त होती है।
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भक्ति भाव से गाने पर घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
कब पढ़ें
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सुबह और शाम आरती के समय इस भजन का पाठ उत्तम है।
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गणेश चतुर्थी, बुधवार, अथवा किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसे गाना विशेष फलदायी माना जाता है।
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विद्यार्थी इसे नियमित पढ़कर विद्या और एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं।
पूजा विधि
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स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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गणेश जी की मूर्ति/चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएं।
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दूर्वा (तीन पत्तियों वाली घास), लाल फूल, लड्डू/मोदक का भोग अर्पित करें।
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दोनों हाथ जोड़कर भजन का पाठ करें और अंत में आरती करें।
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परिवार सहित गणेश जी से सुख-समृद्धि, बुद्धि और सफलता की प्रार्थना करें।
यह भजन श्रद्धा और भक्ति से गाने पर गणेश जी हर कार्य को सरल बनाते हैं और जीवन में खुशहाली लाते हैं।

















