हमे रास्तो की जरूरत नहीं है: यह भजन भक्ति, समर्पण और दिव्य अनुभूति का अद्भुत संगम है। भक्त इस गीत में कहता है कि जब उसे अपने प्रभु (ईश्वर) के चरणों के निशान मिल जाते हैं, तब जीवन में किसी और रास्ते की आवश्यकता नहीं रह जाती। यह भजन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, प्रेम और मार्गदर्शन का प्रतीक है, जहाँ हर दिशा में वही प्रभु विद्यमान हैं। “हमे रास्तो की जरूरत नहीं है” भजन केवल एक गीत नहीं — यह एक आत्मिक अनुभव है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम प्रभु के चरणों को पहचान लेते हैं, तब हर मार्ग, हर मंजिल और हर अंधेरा स्वयं प्रकाश में बदल जाता है। यह भजन सच्चे समर्पण, आस्था और आत्मज्ञान की ओर एक प्रेरणादायक यात्रा है।
हमे रास्तो की जरूरत नहीं है लिरिक्स | Hame Rasto Ki Jarurat Nahi Hai Lyrics in Hindi
हमे रास्तो की जरूरत नहीं है,
हमे तेरे पेरो के निशान मिल गये है ।।
तुम ही हो शिव और ब्रह्मा का संगम,
सब कुछ तुम्हारा सब तुझको अर्पण,
अब तेरा मैं तो मुझमे ही तू है,
हमे रास्तो की जरुरत नहीं है,
हमे तेरे पेरो के निशान मिल गये है ।।
छाये जो दिल में गम का अँधेरा,
तन्हाई में जो मन मेरा घेरा,
खिलता सवेरा लेकर तू रूबरू है,
हमे रास्तो की जरुरत नहीं है,
हमे तेरे पेरो के निशान मिल गये है ।।
कलियों में तू है फूलो में तू है,
सागर की इक इक लहर में भी तू है,
कही भी मैं जाऊ बस तू ही तू है,
हमे रास्तो की जरुरत नहीं है,
हमे तेरे पेरो के निशान मिल गये है ।।
जन जन की सेवा यही मेरी पूजा,
तुम ही हो तुम हो कोई न दूजा,
तुम से है रोशन कण कण में तू है,
हमे रास्तो की जरुरत नहीं है,
हमे तेरे पेरो के निशान मिल गये है ।।
भजन का भावार्थ (Meaning in Hindi)
इस भजन का गहरा अर्थ है “पूर्ण समर्पण”।
भक्त कहता है — जब उसे प्रभु के चरणचिह्न मिल गए, तब जीवन की हर दिशा स्वयं स्पष्ट हो गई।
अब किसी मार्गदर्शक की ज़रूरत नहीं, क्योंकि भगवान ही उसके जीवन का मार्ग बन गए हैं।
भक्त मानता है कि सृष्टि के हर कण, हर फूल, हर लहर, हर हृदय में प्रभु का वास है।
इस भाव में गहराई से प्रेम, आस्था और आत्मसाक्षात्कार की झलक मिलती है।
भजन का सार (Summary)
यह भजन भक्त और भगवान के अद्वैत भाव को दर्शाता है — जहाँ भक्त कहता है कि अब मैं और तू अलग नहीं रहे।
जब प्रभु की उपस्थिति हर जगह महसूस होने लगे, तब भक्ति अपने चरम रूप में पहुँच जाती है।
यह गीत यह भी सिखाता है कि सच्ची पूजा जन-सेवा में है और सच्चा मार्ग वही है जो ईश्वर के चरणों की ओर ले जाए।
क्यों गाया जाता है यह भजन
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जब मन को ईश्वर में स्थिर करना हो।
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जब जीवन में दिशा या शांति की खोज हो।
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ध्यान, आरती या भक्ति साधना के समय।
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ईश्वर के प्रति आभार और प्रेम व्यक्त करने हेतु।
कब गाना चाहिए
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प्रातःकालीन या सायंकालीन ध्यान के समय।
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आरती या भजन संध्या के दौरान।
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जब जीवन में ईश्वर के मार्गदर्शन का अनुभव हो।
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जब मन भक्ति, आत्मचिंतन या ध्यान की अवस्था में हो।
आध्यात्मिक संदेश
“जब भक्त को अपने ईश्वर के चरणचिह्न मिल जाते हैं, तब जीवन का हर मार्ग सरल हो जाता है।
भक्ति में समर्पण ही सबसे बड़ा पथ है — और वही सच्चा ‘मार्गदर्शन’ है।”
FAQs – हमे रास्तो की जरूरत नहीं है भजन से जुड़े प्रश्न
Q1. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
कि सच्चे भक्त के लिए ईश्वर ही मार्ग हैं — बाकी सब भ्रम है।
Q2. इसे किस अवसर पर गाना उचित है?
ध्यान, पूजा, भजन संध्या, या जब मन जीवन के अर्थ की खोज में हो।
Q3. क्या यह भजन किसी विशेष देवता को समर्पित है?
यह भजन सर्वव्यापक ईश्वर को समर्पित है — जो शिव, विष्णु, ब्रह्मा सभी रूपों में हैं।
Q4. क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?
नहीं, इसे किसी भी समय श्रद्धा और भाव से गाया जा सकता है।





















