गौरा के लाल शिव के दुलारे गणेश जी,
हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी ॥
रिद्धि भी है सिद्धि भी है बुद्धि तुम्हारे पास,
दुनिया के हर विकारों की शुद्धि तुम्हारे पास,
मन से हर एक माया को मारे गणेश जी,
हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी ॥
महिमा ये तुम्हारी जानता संसार समूचा,
ना अग्रणी ना श्रेष्ठ है तुमसे कोई दूजा,
सारे जगत में सबसे हो न्यारे गणेश जी,
हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी ॥
तिरगुण गुणी आप हैं, गालों के ईश तुम,
हैं ज्ञान के प्रदाता प्रभु, गुण के ईश तुम,
हर ज्ञान निरंजन हमें तारे गणेश जी,
हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी ॥
हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी – श्री गणेश भजन
“हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी” एक भक्तिमय श्री गणेश भजन है, जो विघ्नहर्ता गणेश जी से जीवन के सभी दुख, बाधा और कष्ट दूर करने की करुण प्रार्थना करता है। यह भजन श्रद्धा, ज्ञान और शुद्धि के भाव से परिपूर्ण है।
“हर कष्ट करो दूर हमारे गणेश जी” भजन भगवान गणेश की महिमा, उनकी करुणा और सर्वशक्तिमान स्वरूप को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है। इस भजन में भक्त गणेश जी को गौरा के लाल, शिव के दुलारे और ज्ञान के प्रदाता के रूप में स्मरण करता है।
भजन का भाव यह दर्शाता है कि रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि के स्वामी गणेश जी ही मन की माया, विकार और अज्ञान को दूर कर सकते हैं। जब भक्त पूरे विश्वास के साथ उन्हें पुकारता है, तो हर बाधा स्वतः ही समाप्त होने लगती है। यह भजन गणेश चतुर्थी, पूजा-अर्चना और दैनिक भक्ति के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।


















