हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी – सरस्वती माता प्रार्थना
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे।
जग सिरमौर बनाएँ भारत,
वह बल विक्रम दे,
वह बल विक्रम दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे।
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमय कर दे,
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमय कर दे।
संयम, सत्य, स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे,
संयम, सत्य, स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे।
लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम,
मानवता का त्रास हरें हम,
लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम,
मानवता का त्रास हरें हम।
सीता, सावित्री, दुर्गा माँ,
फिर घर-घर भर दे,
सीता, सावित्री, दुर्गा माँ,
फिर घर-घर भर दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे,
अम्ब विमल मति दे।
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी – सरस्वती माता प्रार्थना
“हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी” केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र-चेतना से जुड़ा हुआ आध्यात्मिक संदेश है। इस प्रार्थना में माँ सरस्वती से शुद्ध बुद्धि, साहस, त्याग, तप, संयम और स्वाभिमान का वर माँगा गया है, ताकि मानव जीवन सार्थक बने और समाज व राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर हों।
प्रार्थना में लव-कुश, ध्रुव और प्रहलाद जैसे आदर्श चरित्रों का स्मरण कर यह संदेश दिया गया है कि सच्चा ज्ञान ही मानवता के कष्टों को दूर कर सकता है। यह रचना विद्यालयों, प्रार्थना सभाओं, बसंत पंचमी और विद्यारंभ के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
Also you may read – Durga Bhajan, Ganesh Bhajan, Khatu Shyam Bhajan, Krishna Bhajan, Mata Rani Bhajan, Shiv Bhajan
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी – एक प्रेरणादायक सरस्वती माता प्रार्थना है, जिसमें ज्ञान, विवेक, साहस, चरित्र और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए माँ से विमल बुद्धि का वरदान माँगा गया है।
यह सरस्वती माता प्रार्थना विद्यार्थियों, शिक्षकों और साधकों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है, जो ज्ञान के साथ-साथ सद्गुण, चरित्र और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करना चाहते हैं। 🙏 जय माँ सरस्वती
Post Comment