मैं जब भी पुकारू माँ – भजन के बोल (Lyrics – Hindi)
मैं जब भी पुकारू माँ, तुम दौड़ी चली आना,
इक पल भी ना रुकना माँ, मेरा मान बड़ा जाना….
नवरात्रों में मैया, तेरी ज्योत जलाऊँगी,
जब ज्योत जले मैया, आके दरश दिखा जाना,
मैं जब भी पुकारू माँ…..
सावन के महीने में, तेरा झूला डालूँगी,
जब झूला डलेगा माँ, ज़रा झूलन आ जाना,
मैं जब भी पुकारू माँ…..
फागुन के महीने में, तेरा कलश भराऊँगी,
जब रंग धुलेगा माँ, तुम खेलन आ जाना,
मैं जब भी पुकारू माँ…..
बीच भंवर में माँ, मेरी नैया डोल रही,
तुम नैया को आकर माँ, ज़रा पार लगा जाना,
मैं जब भी पुकारू माँ…..
मैं जब भी पुकारू माँ भजन में भक्त माँ से विनती करता है कि जब-जब वह पुकारे, माँ बिना रुके दौड़ी चली आए। नवरात्रि, सावन और फागुन जैसे पावन अवसरों के माध्यम से भजन माँ की उपासना, उत्सव और भक्ति भाव को सुंदर रूप में प्रस्तुत करता है।
भजन यह भी दर्शाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में, जब भक्त की नैया बीच भंवर में डोल रही होती है, तब वही माँ उसका एकमात्र सहारा बनती है। यह भजन उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष है, जो माँ को हर सुख-दुख में अपने पास महसूस करना चाहते हैं।
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मैं जब भी पुकारू माँ भजन से जुड़ी विशेष जानकारी
श्रेणी: माता रानी भजन
भाव: श्रद्धा, विश्वास, ममता
मुख्य विषय: हर पुकार पर माँ का स्नेह और संरक्षण
यह भजन माँ की करुणा और भक्त के अटूट विश्वास को दर्शाता है, जो हर श्रद्धालु के हृदय में यह भाव जगाता है कि माँ हमेशा पुकार सुनने के लिए तत्पर रहती हैं। 🙏 जय माता दी


