मझधार में छोड़ चले क्यों अपने दीवाने को

मझधार में छोड़ चले एक मार्मिक कृष्ण भजन है, जो एक भक्त के टूटे मन, उसकी प्रतीक्षा, पीड़ा और अटूट आस्था को भावुक शब्दों में व्यक्त करता है। यह भजन विरह, आशा और शरणागति का सुंदर संगम है, जिसमें भक्त श्याम से अपने दर्द का उत्तर मांगता है।

मझधार में छोड़ चले – भावों से भरा एक कृष्ण भजन

“मझधार में छोड़ चले” भजन भक्त और भगवान श्रीकृष्ण के बीच के उस गहरे भावनात्मक संवाद को दर्शाता है, जहाँ भक्त स्वयं को जीवन की मझधार में अकेला महसूस करता है। यह भजन केवल पीड़ा की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास का प्रतीक है जो हर दुःख के बाद भी प्रभु से जुड़ा रहता है।

भजन की पंक्तियाँ उस इंतजार को बयान करती हैं, जो कभी समाप्त नहीं होता, और उस आशा को भी, जो हर आंसू के साथ और मजबूत होती जाती है। “एक प्यार का नगमा” की तर्ज पर रचा गया यह भजन दिल को छू लेने वाला है और सुनने वाले को आत्मचिंतन के लिए विवश कर देता है।

मझधार में छोड़ चले भजन के बोल (Lyrics)

मझधार में छोड़ चले,
क्यों अपने दीवाने को,
हमने क्या जन्म लिया,
बस आंसू बहाने को।।

तर्ज – एक प्यार का नगमा

इंतजार की हद तो श्याम,
कुछ तो होती होगी,
मेरे हाल को पढ़ करके,
कुछ तो सोची होगी,
आंधी का होता साथ,
ज्यूं दीये को बुझाने को,
हमने क्या जन्म लिया,
बस आंसू बहाने को।।

गम के पिंजरे का मैं,
परकटा परिंदा हूँ,
सब कुछ सह करके मैं,
तेरी आस में जिन्दा हूँ,
देते हो औरों को,
क्या मुझको दिखाने को,
हमने क्या जन्म लिया,
बस आंसू बहाने को।।

नजरों का बिछा के जाल,
क्या दिन ये दिखाना था,
आगे क्या कम थे दर्द,
जो और बढ़ाना था,
अब वक्त नहीं ‘गुट्टू’,
नजरों के फिराने को,
हमने क्या जन्म लिया,
बस आंसू बहाने को।।

मझधार में छोड़ चले,
क्यों अपने दीवाने को,
हमने क्या जन्म लिया,
बस आंसू बहाने को।।

Singer: Suraj Sharma
Lyrics: Guttu Sureka

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