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ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना भजन लिरिक्स और महिमा in Hindi

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना भजन लिरिक्स और महिमा in Hindi

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना भजन: इस विशेष ब्लॉग पोस्ट में भक्त शिरोमणि हनुमान जी महाराज को समर्पित अत्यंत भावुक भजन ‘ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना’ प्रस्तुत किया गया है। पाठकों की भक्ति और सुविधा के लिए हमने यहाँ भजन के मूल लिरिक्स, इसके रचयिता ललित माली जी का विवरण, और प्रत्येक अंतरे का सरल हिंदी भावार्थ सम्मिलित किया है। इसके साथ ही, मेहंदीपुर और सालासर धाम की महिमा के साथ इस भजन को गाने के लाभ और सही समय के बारे में भी विस्तार से बताया गया है ताकि आपकी पूजा और कीर्तन और भी मंगलमय हो सके।

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना भजन लिरिक्स

विवरण जानकारी
Bhajan Title ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना
Bhajan written by ललित माली जी
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ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना भजन लिरिक्स

✨ हाथ पकड़ ले बालाजी, मेरे दुखड़े मिटाओ ना,

अरे ओ बालाजी, मेरे कीर्तन में आओ ना ।।

(तर्ज – ओ सांवरे मुझे तेरी जरुरत है) ✨

🌿 भूत प्रेत वाले भक्ता मेहंदीपुर में आवे,

हुंकार लगावे थारे है,

जंजीर में जकड़े हुए भक्तों के ताले, बाबा खुलावे है,

मार के घोटा बालाजी उनके ‘प्रेत भगाओ ना,

अरे ओ बालाजी, मेरे कीर्तन में आओ ना ।। 🌿

✨ तेरे जैसे भक्तों ने राम गुण गाया, उसका सहारा तुम हो,

रामजी की धुन में जो मगन हो बाबा, नैया चलाते तुम हो,

सालासर वाले बाबा एक बार तो आओ ना,

अरे ओ बालाजी, मेरे कीर्तन में आओ ना ।। ✨

🌿 इज़्ज़त जो मुझको तुमसे मिली है, विश्वास तुम्हारा हर पल,

नैया ‘ललित’ की जो डूबी हुई थी, उसका सहारा बन कर,

इस सारी दुनिया में बाबा भगवा लहराऊंगा,

चारों ओर मे तेरे नाम की ध्वजा लहराऊंगा,

अरे ओ बालाजी, मेरे कीर्तन में आओ ना ।। 🌿

भजन का पंक्ति-वार अर्थ

  • हाथ पकड़ ले बालाजी…: भक्त करुण पुकार करते हुए कहता है कि हे बालाजी महाराज! मेरा हाथ थाम लीजिए और मेरे जीवन के समस्त दुखों को हर लीजिए। मेरे कीर्तन में पधार कर मुझे धन्य करें।

  • भूत प्रेत वाले भक्ता मेहंदीपुर में आवे…: मेहंदीपुर धाम का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि जहाँ भक्त जंजीरों में जकड़े कष्ट लेकर आते हैं, वहाँ आप अपनी हुंकार और गदे (घोटे) के प्रहार से सभी नकारात्मक शक्तियों और प्रेत बाधाओं का नाश कर देते हैं।

  • तेरे जैसे भक्तों ने राम गुण गाया…: जो भी राम नाम का गुणगान करता है, आप उसके सबसे बड़े सहायक बनते हैं। जो आपकी भक्ति की धुन में मगन है, उनकी जीवन रूपी नैया को आप ही पार लगाते हैं। हे सालासर के स्वामी, मेरे बुलावे पर एक बार जरूर आएं।

  • इज़्ज़त जो मुझको तुमसे मिली है…: लेखक (ललित) कहते हैं कि आज समाज में जो भी मान-सम्मान है, वह आपकी ही कृपा है। डूबती हुई नैया को आपने ही सहारा दिया है। अब मैं पूरे विश्व में आपकी भक्ति का भगवा ध्वज लहराऊंगा और आपकी कीर्ति का गान करूँगा।

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना महत्व

यह भजन बालाजी महाराज के दो प्रमुख स्वरूपों—मेहंदीपुर (संकटमोचन) और सालासर (भक्तवत्सल)—का सुंदर मिश्रण है। इस भजन को गाने से साधक के मन का भय समाप्त होता है और उसे सुरक्षा का अनुभव होता है। यह विश्वास दिलाता है कि जब भक्त भगवान के लिए कीर्तन करता है, तो प्रभु साक्षात वहाँ उपस्थित होकर उसके संकटों का निवारण करते हैं।

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना क्यों जपना चाहिए?

हनुमान जी को ‘कलियुग का जागृत देवता’ माना जाता है। इस भजन का गायन या जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक तनाव और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है। यदि कोई भक्त स्वयं को अकेला या असहाय महसूस कर रहा हो, तो यह भजन उसे ‘सालासर वाले’ का साथ होने का साहस प्रदान करता है।

ओ बालाजी मेरे कीर्तन में आओ ना कब जपना चाहिए?

इस भजन को मुख्य रूप से मंगलवार और शनिवार की संध्या को होने वाले सुंदरकांड पाठ या भजन संध्या (कीर्तन) के दौरान गाना चाहिए। साथ ही, जब भी मन अशांत हो या घर में किसी भी प्रकार की बाधा का अनुभव हो, तो शुद्ध मन से बालाजी को बुलाने के लिए इस भजन का गान श्रेष्ठ है।

डिस्क्लेमर: यहाँ दी गई सभी जानकारी उपलब्ध इंटरनेट स्रोतों, भजन संग्रहों और सामान्य हिंदू धर्म मान्यताओं के आधार पर संकलित की गई है। भजन की पंक्तियों में स्थानीय प्रभाव या गायक के अनुसार आंशिक परिवर्तन संभव है।

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