साईं मूरत से कह दो वो बातें करे भजन लिरिक्स और महिमा (Sai baba se kah do woh baten karein)
साईं मूरत से कह दो वो बातें करे भजन: इस भक्ति भजन में शिरडी के दिव्य संत साईं बाबा को समर्पित एक अत्यंत हृदयस्पर्शी प्रार्थना ‘साईं मूरत से कह दो वो बातें करे’ प्रस्तुत की गई है। यह भजन एक भक्त की उस गहरी तड़प को दर्शाता है जब वह अपने आराध्य की प्रतिमा से जीवंत संवाद करना चाहता है। यहाँ पाठकों की सुविधा के लिए भजन के पूर्ण लिरिक्स, प्रत्येक अंतरे का भावपूर्ण हिंदी अर्थ और साईं बाबा के वचनों की महिमा का वर्णन किया गया है ताकि भक्तजन अपनी व्यथा और प्रेम साईं चरणों में अर्पित कर सकें।
| विवरण | जानकारी |
| Bhajan Title | साईं मूरत से कह दो वो बातें करे |
| Bhajan written by | पारंपरिक (साईं भक्त) |
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साईं मूरत से कह दो” भजन लिरिक्स
✨ साईं मूरत से कह दो वो बातें करे, मेरी बातें सुने अपनी बातें कहे । ✨
🌿 मेरे आंसू पे नज़रे करम हो जरा, कदम में आपके मैं हुँ कबसे पड़ा । जो हैं आँखों के आंसू उन्हें पोछ दे, मेरी बातें सुने अपनी बातें कहे ॥ 🌿
✨ हुँ गुनहगार मैं, मैने माना मगर, तुम खताबक्श हो, तुम ही हो रहबर । मैं शरण आ गया हुँ सहारा तो दे, मेरी बातें सुने अपनी बातें कहे ॥ ✨
🌿 अपने वचनो को बाबाजी पूरा करो, नंदी की झोली में साईं आशीष भरो । मैं हूँ तनहा ओ बाबा इशारा तो दे, मेरी बातें सुने अपनी बातें कहे ॥ 🌿
भजन का पंक्ति-वार अर्थ
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साईं मूरत से कह दो वो बातें करे…: भक्त साईं बाबा की प्रतिमा के सामने खड़ा होकर विनती करता है कि हे साईं! आप मौन न रहें, मुझसे बातें करें। मेरी पीड़ा को सुनें और मुझे मार्गदर्शन देने के लिए कुछ कहें।
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मेरे आंसू पे नज़रे करम हो जरा…: भक्त कहता है कि मैं लंबे समय से आपके चरणों में पड़ा हूँ, अब मेरी आँखों के इन आंसुओं पर अपनी कृपा दृष्टि (नज़रे करम) डालिए। मेरे दुख के आंसुओं को पोंछकर मुझे सांत्वना दें।
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हुँ गुनहगार मैं, मैने माना मगर…: स्वीकारोक्ति करते हुए भक्त कहता है कि मैं गलतियों का पुतला हूँ और गुनहगार हूँ, लेकिन आप तो ‘खताबक्श’ (गलतियों को माफ़ करने वाले) और ‘रहबर’ (सच्चे मार्गदर्शक) हैं। अब जब मैं आपकी शरण में आ गया हूँ, तो मुझे बेसहारा न छोड़ें।
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अपने वचनो को बाबाजी पूरा करो…: साईं बाबा ने अपने भक्तों को ग्यारह वचन दिए थे कि जो उनकी शरण आएगा उसका भार वे उठाएंगे। भक्त वही याद दिलाते हुए कहता है कि मेरी सूनी झोली में अपने आशीर्वाद भर दें। मैं स्वयं को अकेला महसूस कर रहा हूँ, मुझे अपनी उपस्थिति का कोई संकेत दें।
साईं मूरत से कह दो महत्व
यह भजन ‘श्रद्धा’ और ‘सबुरी’ (धैर्य) के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका महत्व इस बात में है कि यह भक्त और भगवान के बीच के पर्दे को हटाकर एक सीधा रिश्ता कायम करता है। यह हमें सिखाता है कि साईं बाबा केवल एक पत्थर की मूरत नहीं, बल्कि एक जीवंत चेतना हैं जो अपने भक्तों की हर पुकार को सुनते हैं।
साईं मूरत से कह दो क्यों जपना चाहिए?
जब मन बहुत अशांत हो या अकेलापन महसूस हो, तब इस भजन का गान करने से अद्भुत शांति मिलती है। यह भजन भक्त के भीतर के अपराधबोध (Guilt) को समाप्त कर उसे यह विश्वास दिलाता है कि साईं बाबा उसे स्वीकार करेंगे, चाहे वह कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो। यह करुणा और क्षमा का भाव जागृत करता है।
साईं मूरत से कह दो कब जपना चाहिए?
साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन विशेष माना जाता है। इस भजन को गुरुवार की सुबह शिरडी साईं बाबा की आरती के बाद या संध्या वंदन के समय गाना चाहिए। जब भी आप किसी उलझन में हों और साईं से मार्गदर्शन (इशारा) चाहते हों, तब इस भजन को एकांत में बैठकर शांत मन से गाएं।
डिस्क्लेमर: यहाँ दी गई सभी जानकारी उपलब्ध इंटरनेट स्रोतों, साईं चरित्र और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के आधार पर संकलित की गई है।
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