यह भजन/लोकगीत “तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया” भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और उनकी नटखट अदाओं का मनमोहक चित्रण है। इसमें श्रीकृष्ण के टेढ़ेपन (चाल-ढाल, बंसी, मुरली, मुस्कान और लीलाओं) को बड़ी प्यारी और चंचल शैली में प्रस्तुत किया गया है।
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया लिरिक्स
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया,
मै सीधी मेरी सीधी रे डगरिया,
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया ।।
मथुरा तेरी टेढ़ी, वृन्दावन तेरा टेढ़ा,
टेढ़ी रे तेरी गोकुल नगरिया,
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया ।।
राधा तेरी टेढ़ी, बलदाऊ तेरे टेढ़े,
टेढ़ी रे तेरी यशोदा डुकरिया,
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया ।।
चाल तेरी टेढ़ी, हसी तेरी टेढ़ी,
टेढ़ी रे तेरे मुख पे बाँसुरिया,
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया ।।
ओ टेढ़े तेरी मुरली की धुन पे,
नाच नाच भई टेढ़ी रे कमरिया,
तू टेढ़ा तेरी टेढ़ी रे नजरिया ।।
रूप के रसिया ते, रूप छिपाओ,
माखन मांगू तो आँखे दिखाओ,
टेढ़ो ना बनु तो का करूँ जे बताओ,
घी निकरे ना बिन टेढ़ी उँगरिया,
सीधे को नाए गुजारो री गुजरिया,
टेढ़ी खीर तोहे पाना रे सांवरिया ।।
लिरिक्स – रविंद्र जैन जी
भजन का भाव
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श्रीकृष्ण के नटखट स्वभाव को “टेढ़ा” कहकर प्रेम और हास्य-रस में याद किया गया है।
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मथुरा, वृंदावन, गोकुल – सब कुछ उनके साथ टेढ़ा-सा प्रतीत होता है, क्योंकि उनकी लीलाएँ सीधी-सादी नहीं, बल्कि चंचल और मधुर हैं।
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राधा, बलराम, यशोदा मैया तक सब उनकी टेढ़ी मुरली और टेढ़ी मुस्कान के रंग में रंग जाते हैं।
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ग्वाल-बाल और गोपियाँ उनकी बंसी की धुन पर झूम उठती हैं।
क्यों सुनें/गाएं यह भजन
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इससे श्रीकृष्ण की माखनचोर, बाँसुरीवाले और लीलाधारी स्वरूप का सजीव अनुभव होता है।
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भक्त को हृदय में हास्य, प्रेम और भक्ति रस की अनुभूति होती है।
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यह भजन गाने से मन हल्का, प्रसन्न और भक्तिरस में डूबा हुआ महसूस करता है।
कब गाएं
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जन्माष्टमी, राधाष्टमी और वृंदावन उत्सवों में।
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भजन संध्या, कीर्तन और दही-हांडी जैसे अवसरों पर।
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जब मन को श्रीकृष्ण की लीलाओं और नटखट स्वरूप में रमाना हो।
संक्षिप्त भावार्थ
“हे सांवरिया! तुम तो हर चीज़ में टेढ़े हो – नजरिया, चाल, हंसी, मुरली और लीलाएँ। पर यही टेढ़ापन तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी है। माखन माँगने पर डांटते हो, सीधा-सादा कोई काम तुम्हें भाता ही नहीं। तुम्हारी इन टेढ़ी बातों और अदाओं में ही पूरा ब्रज आनंद और प्रेम रस पाता है।”
यह भजन सुनने या गाने से मन को श्रीकृष्ण की मधुर नटखट छवि का दिव्य आनंद मिलता है।
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