यशोदा तेरो नंदलाला भजन के बोल (Lyrics – Hindi)
यशोदा तेरा नंद लाला
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट होवे,
यशोदा, तेरा, नंद लाला ॥
यशोदा, तेरा, नंद लाला,
यशोदा, तेरा, गोपाल ॥
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट…
मक्खन ना, खावे ओह, मलाई ना खावे ॥
ओह तां, विदुर घर, केले छिलके खावे,
यशोदा, तेरा, नंद लाला ॥
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट…
महल ना, जावे ओह, अटारी नां जावे ॥
ओह तां, कुब्जा घर, दौड़ा-दौड़ा जावे,
यशोदा, तेरा, नंद लाला ॥
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट…
नंद, बाबे दी ओह, इक वी ना सुणदा ॥
ओह जा के, धन्ने दे, हल चलावे,
यशोदा, तेरा, नंद लाला ॥
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट…
सभ, सखियां नूं ओह, बड़ा ही सतावे ॥
ओह तां, मट्कियां, तोड़ गिरावे,
यशोदा, तेरा, नंद लाला ॥
गिल्ली, रेत में, लोट-पोट…
यशोदा तेरो नंदलाला भजन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की सुंदर झलक मिलती है। इसमें बताया गया है कि कैसे नंदलाल गीली रेत में लोट-पोट होते हैं, मक्खन-मलाई छोड़कर भक्त विदुर के घर केले के छिलके खा लेते हैं और राजमहलों की बजाय साधारण भक्तों के घर दौड़ते चले जाते हैं। यह भजन भगवान की उस लीला को दर्शाता है, जहाँ वे ऐश्वर्य से अधिक भक्ति को महत्व देते हैं।
भजन में बालकृष्ण की शरारतें, सखियों को सताना, मटकी फोड़ना और नंद बाबा की बात न मानना – ये सभी प्रसंग भक्ति को आनंद और मुस्कान से भर देते हैं। यही सरलता और बाल-लीला का भाव इस भजन को अत्यंत प्रिय और लोकप्रिय बनाता है।
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यशोदा तेरो नंदलाला भजन से जुड़ी विशेष जानकारी
श्रेणी: कृष्ण भजन
भाव: बाल लीला, भक्ति, आनंद और सरलता
मुख्य विषय: भगवान श्रीकृष्ण का बाल रूप और भक्तवत्सल स्वभाव
भाषा: पंजाबी / हिंदी मिश्रित
अपलोडर: अनिलरामूर्ति भोपाल
यह कृष्ण भजन बाल गोपाल की मासूम शरारतों और भक्तों के प्रति उनके अपार प्रेम को दर्शाता है, जो सुनने वाले के मन को आनंद और भक्ति से भर देता है। 🙏 जय श्री कृष्ण




















