ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए लिरिक्स | O Bansiwale Sanwara Badi Der Lagaye Lyrics
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए भजन: यह ब्लॉग भक्तों के लिए विभिन्न देवी-देवताओं के प्रसिद्ध भजनों के लिरिक्स, उनका अर्थ, महत्व और उनसे मिलने वाली आध्यात्मिक प्रेरणा को सरल हिंदी में प्रस्तुत करता है। यहां आपको कृष्ण, शिव, राम और अन्य देवी-देवताओं के लोकप्रिय भजन पढ़ने और समझने का अवसर मिलता है ताकि भक्तजन भक्ति में और अधिक डूब सकें तथा अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का अनुभव कर सकें।
Bhajan Title: ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए
Bhajan written by: पारंपरिक
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ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए Bhajan Lyrics
✿ (दोहा)
बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों,
जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों,
राधा पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए ।
✿ ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ।।
✿ तर्ज – लम्बी जुदाई ।
✿ एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
उसपे ये सावन आया…हाय,
उसपे ये सावन आया,
आग लगायी,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ।।
✿ चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक वालिये,
ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा,
तेनु वासता दिल दी पुकार दा,
ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा ।।
✿ बाग उजड़ गए खिलने से पहले,
श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले,
कोयल की कुक ने हुक लगाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए ।।
भजन का अर्थ (लाइन दर लाइन)
बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों – इस पंक्ति में राधा और कृष्ण के हाल ही में हुए विरह का भाव व्यक्त किया गया है।
जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों – राधा कहती हैं कि श्याम के बिना इतने लंबे समय तक जीना उनके लिए कठिन है।
राधा पुकारे मेरे श्याम कन्हाई – राधा अपने प्रिय कृष्ण को प्रेम और व्याकुलता से पुकार रही हैं।
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए – यहां कृष्ण से जल्दी आने की विनती की जा रही है क्योंकि उनके बिना मन व्याकुल है।
एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे – राधा कहती हैं कि उनके प्रिय कृष्ण उनके पास नहीं हैं।
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे – उन्हें यह भी आशा नहीं है कि जल्दी उनसे मिलन होगा।
उसपे ये सावन आया – सावन का मौसम प्रेम और मिलन का प्रतीक है, जो विरह को और अधिक बढ़ा देता है।
आग लगायी – विरह की पीड़ा मन में आग की तरह जल रही है।
चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक वालिये – राधा अपने संदेश को किसी के माध्यम से कृष्ण तक पहुंचाने की विनती करती हैं।
ले जा ले जा संदेशा सोहणे श्याम दा – वह चाहती हैं कि उनका प्रेम भरा संदेश श्याम तक पहुंचे।
बाग उजड़ गए खिलने से पहले – जीवन की खुशियां पूरी तरह खिलने से पहले ही विरह आ गया।
श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले – मिलन का समय आने से पहले ही कृष्ण दूर हो गए।
कोयल की कुक ने हुक लगाई – कोयल की मधुर आवाज भी विरह की पीड़ा को और बढ़ा देती है।
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए Importance
यह भजन राधा और कृष्ण के प्रेम और विरह की गहरी भावना को दर्शाता है। इसमें भक्त का अपने भगवान के प्रति प्रेम और मिलने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यह भजन भक्तों को यह सिखाता है कि भगवान के प्रति सच्ची भक्ति और प्रेम हमेशा दिल में जीवित रहना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए Why People Should Chant
इस भजन का गायन करने से मन में भक्ति, प्रेम और शांति का भाव उत्पन्न होता है। यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण को बढ़ाता है। इसे गाने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और भगवान के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव मजबूत होता है।
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए When People Should Chant
इस भजन को विशेष रूप से कृष्ण भक्ति के कार्यक्रमों, भजन संध्या, जन्माष्टमी, सावन मास और मंदिरों में गाया जाता है। इसके अलावा जब भी कोई भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और विरह की भावना को महसूस करना चाहता है, तब इस भजन का गायन किया जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई सभी जानकारी विभिन्न वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री तथा हिंदू धर्म की मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक और आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।
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