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बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में भजन लिरिक्स और महिमा in Hindi

बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में भजन लिरिक्स और महिमा in Hindi

बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में भजन: इस भक्तिमय ब्लॉग में पाठकों के लिए संकटमोचन हनुमान जी का अत्यंत ऊर्जावान और आनंदमयी भजन ‘बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में’ प्रस्तुत किया गया है। यह भजन भगवान राम के प्रति हनुमान जी की अटूट श्रद्धा और उनके निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता है। यहाँ भजन के पूर्ण शब्द, रचयिता विनोद अग्रवाल (हर्ष) जी का नाम, प्रत्येक अंतरे का सरल भावार्थ और इस भजन को गाने के आध्यात्मिक लाभों का सविस्तार वर्णन किया गया है ताकि भक्तजन प्रभु की भक्ति में सराबोर हो सकें।

बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में भजन

विवरण जानकारी
Bhajan Title बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में
Bhajan written by विनोद अग्रवाल (हर्ष) जी
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बजरंगी नाचे रे भजन लिरिक्स

✨ बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में,

ठुमका, लगा ठुमका, लगा ठुमका, लगा छम-छम-छम ।। टेर ।।

(तर्ज – झुमका गिरा रे) ✨

🌿 राजतिलक की है तैयारी, रामादल हरषाये,

राम नाम बिन मोती माला, बाबा को ना भाये,

राम बसे क्या दिल में तेरे, किसी ने है उकसाया,

भरी सभा में चीर के सीना, राम का दर्श कराया ।। बजरंगी ।। 🌿

✨ लाल लंगोटा हाथ में घोटा, पांव पैजनियां साजे,

सियाराम की धुन में खोया, मस्ती में है नाचे,

राम नाम की लगन लगायी, सुधबुध है बिसरायी,

मन ही मन सीता हर्षाये, लेवे आज बलायी ।। बजरंगी ।। ✨

🌿 राम प्रभु की आँख का तारा, लक्ष्मणजी का प्यारा,

सीने में सियाराम बिराजे, भक्त शिरोमणी न्यारा,

श्रीराम का ध्यान लगाये, राम की महिमा गाये,

‘हर्ष’ कहे खड़ताल बजाये, राम सिया को रिझाये ।। बजरंगी ।। 🌿

भजन का पंक्ति-वार अर्थ

  • बजरंगी नाचे रे, श्रीराम के दरबार में…: अयोध्या में प्रभु श्री राम के दरबार में बजरंगबली आनंदित होकर नृत्य कर रहे हैं। उनके पैरों की पायल की छम-छम पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही है।

  • राजतिलक की है तैयारी…: जब भगवान राम के राजतिलक की तैयारी हो रही थी, तब माता सीता द्वारा दी गई कीमती मोतियों की माला हनुमान जी को पसंद नहीं आई क्योंकि उसमें ‘राम नाम’ नहीं लिखा था। जब सभा में उन पर संदेह किया गया, तो उन्होंने अपना सीना चीरकर साक्षात प्रभु राम और माता सीता के दर्शन करा दिए।

  • लाल लंगोटा हाथ में घोटा…: हनुमान जी ने लाल लंगोट धारण किया है, हाथ में गदा (घोटा) है और पैरों में सुंदर पायल है। वे राम नाम की मस्ती में इतने डूबे हैं कि उन्हें अपनी सुध-बुध भी नहीं है। उनकी इस निस्वार्थ भक्ति को देख माता सीता भी अत्यंत प्रसन्न हो रही हैं।

  • राम प्रभु की आँख का तारा…: हनुमान जी भगवान राम के अत्यंत प्रिय और लक्ष्मण जी के दुलारे हैं। वे भक्तों में शिरोमणि हैं क्योंकि उनके हृदय में सदैव सिया-राम वास करते हैं। कवि ‘हर्ष’ कहते हैं कि हनुमान जी खड़ताल बजाकर अपनी भक्ति से राम-सीता को प्रसन्न कर रहे हैं।

बजरंगी नाचे रे महत्व

यह भजन हनुमान जी की उस ‘दास भक्ति’ का प्रतीक है जिसमें भक्त अपने आराध्य की खुशी में पूरी तरह विलीन हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि भौतिक वस्तुओं (जैसे मोतियों की माला) का प्रभु के नाम के आगे कोई मूल्य नहीं है। इस भजन को सुनने और गाने से हृदय में भक्ति का संचार होता है और अहंकार का नाश होता है।

बजरंगी नाचे रे क्यों जपना चाहिए?

इस भजन का गान करने से मन में प्रसन्नता और उत्साह का अनुभव होता है। यह हनुमान जी के सौम्य और आनंदित स्वरूप को दर्शाता है, जिससे साधक के जीवन के तनाव दूर होते हैं। जो भक्त प्रभु राम और हनुमान जी दोनों की संयुक्त कृपा पाना चाहते हैं, उनके लिए यह भजन सर्वश्रेष्ठ है।

बजरंगी नाचे रे कब जपना चाहिए?

चूँकि यह एक उत्सव का भजन है, इसे विशेष रूप से रामनवमी, हनुमान जयंती, दीपावली (राजतिलक के अवसर पर) और सुंदरकांड के समापन के बाद भजन संध्या में गाना चाहिए। मंगलवार को कीर्तन के दौरान सामूहिक रूप से इसका गायन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।

डिस्क्लेमर: यहाँ दी गई समस्त जानकारी उपलब्ध वेबसाइटों, धार्मिक ग्रंथों और हिंदू धर्म की प्रचलित मान्यताओं के आधार पर अपडेट की गई है।

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