यह भजन “तुम संकट हरियो मेरा” भगवान गणेश जी की कृपा और विघ्नहर्ता स्वरूप का भावपूर्ण स्मरण है। इसमें भक्त गणपति बप्पा से विनती करता है कि जैसे वे सदा संकट में भक्तों की लाज रखते हैं, वैसे ही उसके सभी दुःख-दर्द और कठिनाइयों का निवारण करें।

यहां आज सभा में सबसे पहले सुमिरन करता तेरा लिरिक्स
यहां आज सभा में सबसे पहले, सुमिरन करता तेरा,
तुम संकट हरियो मेरा-२
तर्ज: जहाँ डाल-डाल पर…..
तुम सब देवन में देव बड़े हो, पहले तुम्हें मनाते,
संकट में आकर भक्तों की, तुम ही तो लाज बचाते,
अब लाज आज रख मेरी भी, संकट ने मुझको घेरा,
तुम संकट हरियो मेरा-२
मात तुम्हारी पार्वती, शंकर जी पिता कहाते,
तुम मूषक चढ़ के आवो गणपति, भक्त तुम्हें हैं बुलाते,
अब आकर भोग लगावो गणपति, बालक जान के तेरा,
तुम संकट हरियो मेरा-२
जो सच्चे मन से करे ध्यावना, उसके काज बन जाते,
जो नर ना करे पूजा तेरी, वो सफल नहीं हो पाते,
अपने भक्त की लाज राख तेरी, शरण में डाला डेरा,
तुम संकट हरियो मेरा-२
यहां आज सभा में सबसे पहले, सुमिरन करता तेरा,
तुम संकट हरियो मेरा-२
क्यों पढ़ें यह भजन
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जीवन में आने वाले संकट, कठिनाइयाँ और बाधाएँ दूर होती हैं।
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भगवान गणेश की कृपा से भक्ति, बल, बुद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
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इस भजन का पाठ करने से मन में आशा, आत्मविश्वास और शांति आती है।
कब पढ़ें
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सुबह-संध्या की पूजा, आरती के समय।
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गणेश चतुर्थी, बुधवार या संकट चतुर्थी पर।
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जब जीवन में कोई कठिनाई या संकट सामने हो।
पूजा विधि
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स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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गणेश जी की प्रतिमा/चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएं।
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दूर्वा, मोदक/लड्डू और लाल फूल चढ़ाएं।
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दोनों हाथ जोड़कर श्रद्धा से इस भजन का पाठ करें।
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अंत में गणेश आरती करें और परिवार सहित उनका स्मरण करें।
इस भजन का गान करने से भक्त को यह विश्वास मिलता है कि गणेश जी संकट हरने वाले हैं और वे सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
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