राणे वर रा काई पर्णीजूं लिरिक्स, भावार्थ, सार और महत्व | Rane Var Ra Kai Parni Jo Lyrics in Hindi

राणे वर रा काई पर्णीजूं : यह भजन मीरा की दिव्य भक्ति और उनके श्याम (कृष्ण) के प्रति समर्पण की कहानी को प्रस्तुत करता है। मीरा अपने आपको संसारिक रिश्तों से ऊपर उठाकर केवल सांवरे के चरणों में अर्पित कर देती हैं। इस भजन में उनका प्रेम, समर्पण, त्याग और ईश्वर से एकाकार होने की लालसा को अत्यंत मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है।

राणे वर रा काई पर्णीजूं लिरिक्स

राणे वर रा काई पर्णीजूं लिरिक्स | Rane Var Ra Kai Parni Jo Lyrics in Hindi

राणे वर रा काई पर्णीजूं, जनम जनम मर जावै,
वर परणीजू साँवरो, अमर चूड़ो होय जाय,
कूढ़ करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय,
हरख करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय ।।

राणे प्यालो भेजिया रे, दीयो मीरो रे हाथ,
अमरत कर मीरो आरोग्या, मने साँवऱियो पर्णाय,
कूढ़ करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय,
हरख करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय ।।

रोणे बाषक छेड़िया ने, गया मीरो रे वास,
हार करे मीरो हलोलिया, साँवऱियो परणाय,
कूढ़ करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय,
हरख करे मोरी माय, मीरा नै साँवऱियो पर्णाय ।।

लिरिक्स – मीराबाई जी

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भजन का भावार्थ (Meaning in Hindi)

इस भजन में मीरा अपनी ईश्वर प्रेम की चरम अवस्था को व्यक्त करती हैं।

  • वह कहती हैं कि अगर संसार का वर (दुल्हा) चुनूँ तो जन्म–जन्मांतर भटकूँगी, इसलिए मैंने अपना जीवन साँवरिया को समर्पित कर दिया

  • मीरा को संसारिक परिवार समझ नहीं पाता और उनसे नाराज़ होता है, लेकिन मीरा के लिए आनंद का कारण केवल श्याम हैं

  • जहर का प्याला भेजा जाता है, पर वह भी मीरा के लिए अमृत बन जाता है क्योंकि उनके लिए श्याम की इच्छा ही अंतिम है

  • मीरा हर कठिनाई, हर ताने, हर दुख के बावजूद कहती हैं —
    “मेरा जीवन, मेरा प्राण, मेरा वर—केवल सांवरिया है”।

भजन का सार (Summary)

  • मीरा का यह गीत अटूट प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

  • यह बताता है कि सच्चा प्रेम आत्मा का होता है, शरीर का नहीं

  • मीरा संसारिक रिश्तों और बंधनों से मुक्त होकर केवल अपने प्रियतम कृष्ण को पति मानती हैं।

  • यह भजन बताता है कि जब भक्ति सच्ची होती है, तो भगवान स्वयं भक्त की रक्षा करते हैं — चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

क्यों गाया जाता है यह भजन

🔹 गहरी भक्ति जागृत करने के लिए
🔹 मन को भगवान के प्रति समर्पण की ओर ले जाने के लिए
🔹 मीरा के प्रेम और त्याग की भावना को अनुभव करने के लिए
🔹 भक्ति समारोह, कीर्तन और सत्संग में कृष्ण प्रेम का संदेश देने के लिए
🔹 जब मन संसारिक दुखों में उलझ जाए और दिशा चाहिए

कब गाना चाहिए

✔️ कृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी या किसी भी कृष्ण-समर्पित पर्व पर
✔️ मीरा महारानी के भजन, सत्संग, कीर्तन और भक्ति सभा में
✔️ जब मन व्याकुल हो और ईश्वर पर भरोसा जगाना हो
✔️ जब भक्ति में प्रेम और समर्पण की भावना बढ़ानी हो

FAQs – राणे वर रा काई पर्णीजूं भजन से जुड़े प्रश्न

Q1. यह भजन किसने लिखा है?

यह रचना स्वयं संत मीराबाई जी की है।

Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

संसारिक रिश्तों से ऊपर उठकर ईश्वर को जीवन का वास्तविक पति और साथी मानना।

Q3. क्या यह भजन मीरा के जीवन से जुड़ी वास्तविक घटनाओं पर आधारित है?

हाँ, इस भजन में जहर का प्याला, परिवार की नाराज़गी, और भक्ति का समर्पण—मीरा के जीवन की वास्तविक घटनाएँ हैं।

Q4. क्या इसे केवल मंदिर में ही गाया जाता है?

नहीं, इसे सत्संग, कीर्तन, घर की पूजा और भक्ति अवसरों पर कहीं भी गाया जा सकता है।

Q5. इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?

मन में समर्पण, स्थिरता, शांति और ईश्वर के प्रति प्रेम बढ़ता है।

राणे वर रा काई पर्णीजूं Video Song

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