यह भजन “बरसाने बजत बधाई, किरत ने लाली जाई” राधारानी के जन्मोत्सव (राधाष्टमी) के मंगल गीत के रूप में गाया जाता है। इसमें राधारानी के बरसाने आगमन की खुशी का वर्णन है। संपूर्ण ब्रज मंडल आनंद और उत्सव से भर उठता है, क्योंकि राधारानी को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर सब उनका स्वागत करते हैं।
क्यों गाया जाता है यह भजन
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यह भजन राधारानी के जन्म की महिमा और उनकी आनंदमयी छवि को दर्शाता है।
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गाने से मन में भक्ति, प्रेम और उल्लास का संचार होता है।
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यह विशेष रूप से राधाष्टमी, जन्माष्टमी और ब्रज उत्सवों में गाया जाता है।
कब गाएं
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राधाष्टमी, जन्माष्टमी और किसी भी ब्रज उत्सव में।
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सुबह-शाम पूजा या संकीर्तन के समय।
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जब भी भक्त मन को राधा-कृष्ण के प्रेम रस में रंगना चाहे।
भावार्थ (सरल अर्थ)
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जब राधारानी बरसाने आती हैं तो पूरा ब्रज आनंद में डूब जाता है।
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उनकी सूरत चाँद जैसी सुंदर और तीनों लोकों से न्यारी है।
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ढोल, मृदंग और शहनाई की ध्वनि से वातावरण मंगलमय हो जाता है।
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लोग उनकी मुस्कान और सौंदर्य से मोहित हो जाते हैं, मानो लक्ष्मी जी स्वयं घर आई हों।
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सखियाँ नजर उतारकर और बलिहार जाती हैं, क्योंकि राधारानी ब्रज की प्राण प्रियतम हैं।
इस भजन को गाने से भक्त को राधारानी के जन्मोत्सव की झांकी और बरसाने का दिव्य आनंद अनुभव होता है।
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