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महल को देख डरे सुदामा भजन लिरिक्स हिंदी में | श्रीकृष्ण–सुदामा मित्रता भजन अर्थ सहित

महल को देख डरे सुदामा भजन लिरिक्स हिंदी में | श्रीकृष्ण–सुदामा मित्रता भजन अर्थ सहित

महल को देख डरे सुदामा : यह भजन भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की निष्कलंक मित्रता, दीनता और प्रभु कृपा को दर्शाने वाला अत्यंत भावपूर्ण भजन है। इस भजन में सुदामा जी की सरलता, संकोच और कृष्ण की अपार करुणा का सुंदर चित्रण मिलता है। इस ब्लॉग में भजन के मूल लिरिक्स, उनका पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, भजन का आध्यात्मिक महत्व, जप करने के कारण और उपयुक्त समय को सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक श्रीकृष्ण भक्ति और सच्ची मित्रता के भाव को गहराई से अनुभव कर सकें।

भजन का शीर्षक: महल को देख डरे सुदामा

भजन लिखने वाले: सूरदास

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महल को देख डरे सुदामा भजन लिरिक्स

🏰 महल को देख डरे सुदामा
का रे भई मोरी राम मड़ईया
कहाँ के भूप उतरे

🚶‍♂️ इत उत भटकत, चहुँ ओर खोजत
मन में सोच करे
का रे भई मोरी राम मड़ईया
प्रभु से विनय करे

👑 कनक अटारी चढ़ी बोली सुंदरी
काहे भटक रह्यो
सकल सम्पदा है गृह भीतर
दीनानाथ भरे

🐘 प्रथम द्वार गजराज विराजे
दूजे अश्व खड़े
तीजे द्वार विश्वकर्मा बैठे
हीरा-रतन जड़े

🙏 दीनानाथ तिन्हन के अंदर
जा पर कृपा करे
सूरदास प्रभु आस चरण की
दुःख दरिद्र हरे

भजन का पंक्ति-वार अर्थ

महल को देख डरे सुदामा
सुदामा जी जब श्रीकृष्ण के भव्य महल को देखते हैं तो संकोच और भय से भर जाते हैं।

का रे भई मोरी राम मड़ईया, कहाँ के भूप उतरे
वे सोचते हैं कि कहीं वे किसी राजा के महल में तो नहीं आ गए।

इत उत भटकत, चहुँ ओर खोजत, मन में सोच करे
सुदामा चारों ओर भटकते हुए मन ही मन विचार करते हैं।

का रे भई मोरी राम मड़ईया, प्रभु से विनय करे
वे प्रभु से मन ही मन विनती करते हैं।

कनक अटारी चढ़ी बोली सुंदरी, काहे भटक रह्यो
स्वर्ण महल से एक सुंदरी पूछती है कि आप क्यों भटक रहे हैं।

सकल सम्पदा है गृह भीतर, दीनानाथ भरे
इस घर में सारी संपदा है क्योंकि दीनों के नाथ श्रीकृष्ण यहाँ विराजते हैं।

प्रथम द्वार गजराज विराजे, दूजे अश्व खड़े
महल के द्वार पर हाथी और घोड़े शोभायमान हैं।

तीजे द्वार विश्वकर्मा बैठे, हीरा-रतन जड़े
तीसरे द्वार पर शिल्पकार विश्वकर्मा की कला और रत्नों की शोभा है।

दीनानाथ तिन्हन के अंदर, जा पर कृपा करे
जिस पर प्रभु की कृपा होती है, वही इस वैभव को प्राप्त करता है।

सूरदास प्रभु आस चरण की, दुःख दरिद्र हरे
कवि सूरदास प्रभु के चरणों की शरण में हैं जो सभी दुख और दरिद्रता हर लेते हैं।

महल को देख डरे सुदामा भजन का महत्व

यह भजन सिखाता है कि सच्ची मित्रता धन, वैभव या पद से नहीं बल्कि प्रेम और भाव से होती है। श्रीकृष्ण की कृपा से निर्धन सुदामा भी परम सुख और सम्मान प्राप्त करते हैं।

महल को देख डरे सुदामा लोगों को क्यों जपना चाहिए

इस भजन का जप अहंकार को दूर करता है, विनम्रता और विश्वास का भाव बढ़ाता है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि ईश्वर अपने भक्त की भावना देखते हैं, उसकी स्थिति नहीं।

महल को देख डरे सुदामा कब जपना चाहिए

इस भजन का पाठ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी, गुरुवार, सत्संग, कथा या जब भी मन विनम्रता और भक्ति से भर जाए तब किया जा सकता है।

अस्वीकरण : इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारी अन्य वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री एवं हिंदू धर्म की मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य केवल भक्ति भाव और सामान्य जानकारी प्रदान करना है।

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