लाज रखो गिरिधारी भजन प्रभु श्रीकृष्ण से शरणागत भाव में की गई प्रार्थना है। भक्त अपने मन की पीड़ा, भय और चिंता को भगवान के चरणों में अर्पित करते हुए उनसे रक्षा और मर्यादा बनाए रखने की विनती करता है। भजन में महाभारत के पवित्र प्रसंग—अर्जुन की रक्षा और द्रौपदी की लाज—का सुंदर उल्लेख है, जो दर्शाता है कि भगवान सदैव अपने भक्तों की लाज रखते हैं और संकट में उन्हें संभालते हैं।
लाज रखो गिरिधारी लिरिक्स | Laaj Rakho Girdhari Lyrics in Hindi
लाज रखो गिरिधारी,
मोरी लाज रखो गिरिधारी ।।
जैसी लाज राखी अर्जुन की,
भारत-युद्ध मँझारी,
सारथी होके रथ को हाक्यो,
चक्र सुदर्शन धारी,
भक्त की एक न टारी,
लाज रखो गिरधारी ।।
जैसी लाज राखी द्रोपदी की,
होन न दीन उघारी,
खेंचत खेंचत दोउ भुज थाक्यो,
दुःशासन पच धारी,
चीर बढ़ायो मुरारी,
लाज रखो गिरधारी ।।
‘सूरदास’ की राखो लाज प्रभु,
अब को है रखवारी,
राधे राधे सुमरो प्यारो,
श्री वृषभानु-दुलारी,
शरण मैं आयो तिहारी,
लाज रखो गिरधारी ।।
लिरिक्स – सूरदास जी
लाज रखो गिरिधारी भजन का भावार्थ (Meaning in Hindi)
इस भजन का मूल भाव है—प्रभु की शरण में जाना और उनसे रक्षा की प्रार्थना करना।
-
भक्त कहता है कि जैसे कृष्ण ने अर्जुन की रक्षा की, उन्हें मार्ग दिखाया, उसी तरह मेरी भी रक्षा करो।
-
जैसे द्रौपदी की लाज बचाई, वैसे ही मेरे सम्मान, मेरे मन, मेरे जीवन की रक्षा करो।
-
अंत में सूरदास अपने आप को भगवान की गोद में सौंप देते हैं और कहते हैं—
“प्रभु अब आपकी ही शरण है, कृपा करके मेरी लाज रखिए।”
इस भजन में भक्ति, विश्वास और surrender (शरणागति) का अद्भुत संगम है।
लाज रखो गिरिधारी भजन का सार (Summary)
-
भगवान कृष्ण सदैव भक्तों के रक्षक हैं।
-
संकट में भी वह अपने भक्त का साथ नहीं छोड़ते।
-
भक्ति का आधार है—विश्वास और समर्पण।
-
जो परमात्मा को पुकारता है, उसकी लाज वह अवश्य रखते हैं।
लाज रखो गिरिधारी भजन का महत्व (Importance)
-
यह भजन मन में विश्वास, शांति और सुरक्षा की भावना उत्पन्न करता है।
-
जब मन दुख, भय या संकट में होता है, तब यह भजन अत्यंत शक्ति देता है।
-
हर भक्त को यह भजन याद दिलाता है कि—
“भगवान कभी अपनी शरण में आए व्यक्ति को निराश नहीं करते।”
कब गाया जाता है यह भजन?
-
जब मन भारी हो या जीवन में कोई समस्या हो।
-
पूजा, भजन संध्या, कीर्तन और संकल्प के समय।
-
भगवान से सहायता या कृपा की प्रार्थना करते हुए।
-
द्रौपदी और अर्जुन की कथाओं को याद करके भगवान की महिमा गाते समय।



