जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं लिरिक्स (Jimon ji babaji manwar main karun Khatu Shyam bhajan lyrics in hindi)

यह अत्यंत प्रिय और भावपूर्ण भजन “जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं” खाटूधाम के बाबा श्याम जी के प्रति भक्ति और भोग अर्पण का वर्णन करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की सच्ची श्रद्धा के साथ चूरमें और अन्य प्रिय भोग अर्पित करने की मनोकामना प्रकट करता है।

जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं लिरिक्स

जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं लिरिक्स

जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं,
चूरमें की थाली थारे, सामने धरूं ।।

तर्ज – बोलो जी दयालु ।

आंटे मांही देसी घी को, मूण दियो,
हाथां सु मसल आटो, गूंथ लियो,
उखल मांही कूट ल्यायो, जीमो तो सरु ।।

चूरमें में देसी बूरा, दीन्ही मैं मिला,
कतर कतर मेवा, मायने दिया,
भोग थे लगाओ, अरदास मैं करूँ ।।

छोटोड़ी इलायची का, दाणा घाल्या मांय,
मुठ्ठी भर केशर बुरकाई, चूरमें के मांय,
आरोगो महाराज थारे, चरणाँ में पडूं ।।

पड़दो लगायो बाबा, आओ तो सरी,
रुच रुच भोग थे, लगाओ तो सरी,
‘हर्ष’ दयालु थांसु, अरज करूँ ।।

 

भजन का भाव

भजन में भक्त बाबा श्याम की दयालुता, कृपा और अपने जीवन में उनके आश्रय का अनुभव करता है।

  • “जीमों जी बाबाजी, मनवार मैं करूं, चूरमें की थाली थारे, सामने धरूं” — भक्त सच्चे मन से भोग अर्पित करता है और बाबा के सामने अपनी श्रद्धा प्रकट करता है।

  • “आंटे मांही देसी घी को, मूण दियो, हाथां सु मसल आटो, गूंथ लियो” — भोग बनाने की प्रक्रिया में श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया गया है।

  • “छोटोड़ी इलायची का, दाणा घाल्या मांय, मुठ्ठी भर केशर बुरकाई” — भोग में प्रत्येक सामग्री का विशेष महत्व है, जिससे भक्त का प्रेम और भक्ति बढ़ती है।

  • “आरोगो महाराज थारे, चरणाँ में पडूं” — भक्त का समर्पण पूर्ण है, और वह बाबा श्याम से सुख, स्वास्थ्य और कृपा की कामना करता है।

क्यों गाया जाता है यह भजन

  • भक्त के हृदय में बाबा श्याम के प्रति प्रेम और भक्ति जगाने के लिए।

  • भोग अर्पित करने और आराधना में मन की एकाग्रता बनाए रखने के लिए।

  • बाबा श्याम की कृपा और संरक्षण का स्मरण कर जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए।

🎵 कब गाएं
  • खाटूधाम के दर्शन या भजन संध्या में।

  • व्यक्तिगत साधना और भोग अर्पण के समय।

  • जब भक्त मन से बाबा श्याम की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता हो।

संक्षिप्त भावार्थ
“हे बाबाजी! आपके चरणों में चूरमें और अन्य भोग अर्पित कर मैं अपनी भक्ति प्रकट करता हूँ। आपके कृपालु दृष्टि से मेरे जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि आए। आपका दर्शन और कृपा मेरे जीवन का सर्वोच्च सुख है।”

यह भजन गाते समय भक्त का मन बाबा श्याम की दयालुता, कृपा और प्रेम में रम जाता है और उसे अनुभव होता है कि उनका आशीर्वाद जीवन को पूर्णता और आनंद प्रदान करता है।

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