खाटू जो जाकर आई एकली भजन लिरिक्स, अर्थ, महत्व और गाने का सही समय
खाटू जो जाकर आई एकली भजन: इस लेख में आपको भजन से जुड़ी मूल जानकारी, लेखक का नाम, अन्य भजनों का स्रोत, पूरी लिरिक्स बिना किसी बदलाव के, प्रत्येक पंक्ति का अर्थ, साथ ही इस भजन को गाने का महत्व और उचित समय की जानकारी मिलेगी। यह भजन भक्त और परिवार के भावनात्मक संवाद के माध्यम से खाटू श्याम जी के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
Bhajan Title
खाटू जो जाकर आई एकली
Bhajan written by
शुभम रूपम जी
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खाटू जो जाकर आई एकली भजन लिरिक्स
✿✿ खाटू जो जाकर आई एकली लिरिक्स ✿✿
✿ Khatu Jo Jakar Aai Ekli Lyrics ✿
❀ ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ।। ❀
❀ तर्ज – ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ । ❀
❀ ओ म्हारे पीहर का के मन में तो खटास हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ।। ❀
❀ ओ म्हारे बालम से खरी-खोटी बात हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ।। ❀
❀ ओ म्हाने ताणा मारण ने सगला भेड़ा हो गया,
बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली,
अरे तू तो बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली ।। ❀
❀ हो इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो,
नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली,
अरे मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली,
ओ सुन लियो, नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली,
अरे मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली ।। ❀
✿ लिरिक्स – शुभम रूपम जी ✿
इस भजन का अर्थ (पंक्ति दर पंक्ति)
ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई – मेरी ननद मुझसे नाराज़ हो गई।
खाटू जो जाकर आई एकली – क्योंकि मैं खाटू श्याम जी के दर्शन करने अकेली चली गई।
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली – मैं सच में अकेली ही दर्शन करके आई हूँ।
ओ म्हारे पीहर का के मन में तो खटास हो गई – मेरे मायके वालों के मन में भी थोड़ी नाराज़गी आ गई।
खाटू जो जाकर आई एकली – क्योंकि मैं बिना बताए अकेली चली गई।
ओ म्हारे बालम से खरी-खोटी बात हो गई – मेरे पति से भी थोड़ी बहस हो गई।
खाटू जो जाकर आई एकली – क्योंकि मैंने उनसे पूछे बिना यात्रा की।
ओ म्हाने ताणा मारण ने सगला भेड़ा हो गया – सब लोग मुझे ताने देने लगे।
बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली – सबने पूछा कि मेला अकेले क्यों देखने गई।
हो इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो – अब अगली बार मेले में सब लोग तैयार रहना।
नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली – नहीं तो मैं फिर अकेली ही चली जाऊँगी।
अरे मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली – तब पति कहते हैं कि मैं भी साथ चलूँगा, तुम अकेली मत जाना।
खाटू जो जाकर आई एकली महत्व
यह भजन भक्त और परिवार के बीच प्रेम, संवाद और खाटू श्याम जी के प्रति आस्था को दर्शाता है। इसमें दिखाया गया है कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा व्यक्ति को हर परिस्थिति में प्रेरित करती है। यह भजन राजस्थान की लोक संस्कृति और पारिवारिक भावनाओं को भी सुंदर रूप में प्रस्तुत करता है।
खाटू जो जाकर आई एकली क्यों गाना चाहिए
इस भजन को गाने से मन में भक्ति भावना जागृत होती है। यह हमें सिखाता है कि भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा सबसे ऊपर है। साथ ही यह परिवार में प्रेम और एकता का संदेश भी देता है। खाटू श्याम जी के भक्त इस भजन को गाकर अपने मन की भावनाएं व्यक्त करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
खाटू जो जाकर आई एकली कब गाना चाहिए
यह भजन विशेष रूप से खाटू श्याम जी के मेले, फाल्गुन मास, एकादशी, या किसी भी शुभ अवसर पर गाया जाता है। इसके अलावा जब भी मन में भक्ति भाव जागृत हो, तब इस भजन का कीर्तन किया जा सकता है।
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