यहां आज सभा में सबसे पहले सुमिरन करता तेरा लिरिक्स (Yahan aaj sabha me sabse pahle sumiran karta tera bhajan)
यह भजन “तुम संकट हरियो मेरा” भगवान गणेश जी की कृपा और विघ्नहर्ता स्वरूप का भावपूर्ण स्मरण है। इसमें भक्त […]
यह भजन “तुम संकट हरियो मेरा” भगवान गणेश जी की कृपा और विघ्नहर्ता स्वरूप का भावपूर्ण स्मरण है। इसमें भक्त […]
यह भजन “मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे, भोले बाबा जी की आँखों के तारे” भगवान गणेश जी की बाल-सुलभ, स्नेहपूर्ण
यह भजन “गजानन अलबेली सरकार, गौरी नन्दन शिवसुत प्यारे, है मूसे असवार” भगवान गणेश जी की स्तुति में रचा गया
यह भजन “ऋद्धि सिद्धि संग आय बिराजो, म्हारै घर सरकार, गजानन करियो बेड़ो पार” भगवान गणेश जी की स्तुति में
यह भजन “आओ अंगना पधारो श्री गणेश जी” भगवान गणपति की स्तुति और स्वागत का भावपूर्ण गीत है। इसमें गणेश
यह भजन “किशोरी लाडली” राधा रानी के जन्म, रूप, स्नेह और उनके अद्वितीय महत्व का सुंदर वर्णन करता है। इसमें
यह भजन “घर में पधारो गजाननजी” भक्तों की विनम्र प्रार्थना है जिसमें भगवान गणेश जी सहित राम-लक्ष्मण-सीता, ब्रह्मा-विष्णु-महेश, माता लक्ष्मी,
यह भजन “ओ गोरा के लाल तेरी पूजा है जग करता” भगवान गणेश जी की महिमा का गान है, जिसमें
मुझे श्याम सुन्दर की दुल्हन बना दो: यह भजन पूज्य संत माँ ब्रज देवी जी द्वारा रचित है और इसमें
यह भजन “छोटी-छोटी गैया, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल” भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर चित्रण करता
भजन “इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले” एक भावपूर्ण प्रार्थना है जिसमें भक्त अपने जीवन के अंतिम
यह भजन “राम नाम सुखदाई भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का” जीवन की नश्वरता और भक्ति की महिमा
यह भजन “तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान” भक्ति और समर्पण का सुंदर संदेश देता है। इसमें भक्त
यह भजन “मन लागो मेरो यार फकीरी में” संत कबीर दास जी का अमूल्य संदेश है, जिसमें साधु जीवन और
यह भजन “रसना निस दिन भज हरिनाम” भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की संयुक्त महिमा का गान है। इसमें भक्त को
यह भजन “भज मन राम चरण सुखदाई” गोस्वामी तुलसीदास जी की रचना है, जिसमें भगवान श्रीराम के चरणों की महिमा
यह भजन “मत कर तू अभिमान रे बन्दे” अनूप जलोटा जी द्वारा गाया गया एक गहन जीवन संदेश देने वाला
राम कथा में वीर जटायु का अपना अनुपम स्थान, तुलसी ने बड़भागी कहकर, किया जटायु का यशगान ।। सीता हरणं
(दोहा: राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंत काल पछतायेगा, जब प्राण जायेंगे छूट) तेरे मन में
चीर के छाती बोले अपनी पवन पुत्र हनुमान, मेरे मन में बसे हैं राम, मेरे तन में बसे हैं राम