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सांवरिया कर दो बेड़ा पार भजन लिरिक्स हिंदी में | खाटू श्याम भजन अर्थ सहित

सांवरिया कर दो बेड़ा पार भजन लिरिक्स हिंदी में | खाटू श्याम भजन अर्थ सहित

सांवरिया कर दो बेड़ा पार : यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति एक भक्त की करुण पुकार है, जिसमें वह जीवन रूपी नाव को पार लगाने की प्रार्थना करता है। इसमें उम्र बीतने का एहसास, संसार की निरर्थकता और प्रभु दर्शन की तीव्र इच्छा व्यक्त की गई है। इस लेख में “सांवरिया कर दो बेड़ा पार” भजन के मूल बोल, पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ, आध्यात्मिक महत्व, जप के लाभ और उचित समय का सरल हिंदी में वर्णन किया गया है, ताकि भक्त श्याम प्रभु की शरण में आकर शांति और कृपा का अनुभव कर सकें।

भजन का शीर्षक: सांवरिया कर दो बेड़ा पार

भजन लिखने वाले: पारंपरिक / प्रचलित भजन

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सांवरिया कर दो बेड़ा पार भजन लिरिक्स

✨ सांवरिया कर दो बेड़ा पार, सांवरिया कर दो बेड़ा पार
मैं तो बावरी दर-दर भटकू, कर दो ना उपकार ✨

🌿 आधी उमरिया बीती मेरी, चेहरे पर पड़ गई मेरे झुर्री
ना यो नकली लेप सुहावे, तेरे भवन की छाया है भावे 🌿

🌸 तेरे दरस की मन में आवे, ना करनो इनकार
सांवरिया कर दो बेड़ा पार 🌸

🌼 मैं तो तेरे चरणों में बैठी, आई हूं मैं चढ़ के यह सीढ़ी
लाई हूं मैं चोखा ये लिट्टी, संग में ल्याई खीर या मीठी 🌼

🌺 कदे ना चढ़ जा इस पर चींटी, खाओ न गटकार
सांवरिया कर दो बेड़ा पार 🌺

🕉️ मैं तो हूं तेरी ही दासी, ना हूं मैं कोई भोग अभिलाशी
तेरी भक्ति में भजन मैं गाऊ, तेरे द्वार पर रोज ही आऊ 🕉️

🌊 तेरे रूप ने रोज निहारू, ना घालो रे कजरार
सांवरिया कर दो बेड़ा पार 🌊

🙏 भूल हुई तो मुझको बताओ, अच्छा मार्ग मुझको सुझाओ
कभी आप सपने में आओ, जाकर अपना रूप दिखाओ
सांवरिया कर दो बेड़ा पार 🙏

भजन का पंक्ति-वार अर्थ

सांवरिया कर दो बेड़ा पार
भक्त जीवन रूपी नाव को पार लगाने की प्रार्थना करता है।

मैं तो बावरी दर-दर भटकू, कर दो ना उपकार
भक्त स्वयं को असहाय मानकर कृपा की याचना करता है।

आधी उमरिया बीती मेरी, चेहरे पर पड़ गई मेरे झुर्री
जीवन का अधिक समय बीत चुका है।

ना यो नकली लेप सुहावे, तेरे भवन की छाया है भावे
संसारिक सजावट नहीं भाती, प्रभु की छाया ही प्रिय है।

तेरे दरस की मन में आवे, ना करनो इनकार
प्रभु दर्शन की तीव्र इच्छा है।

मैं तो तेरे चरणों में बैठी, आई हूं मैं चढ़ के यह सीढ़ी
भक्त पूरी श्रद्धा से प्रभु के द्वार आया है।

लाई हूं मैं चोखा ये लिट्टी, संग में ल्याई खीर या मीठी
भक्त प्रेम से प्रसाद अर्पित करता है।

मैं तो हूं तेरी ही दासी, ना हूं मैं कोई भोग अभिलाशी
भक्त केवल सेवा चाहता है, भोग नहीं।

तेरी भक्ति में भजन मैं गाऊ, तेरे द्वार पर रोज ही आऊ
निरंतर भक्ति की भावना।

भूल हुई तो मुझको बताओ, अच्छा मार्ग मुझको सुझाओ
प्रभु से सही मार्गदर्शन की प्रार्थना।

कभी आप सपने में आओ, जाकर अपना रूप दिखाओ
भक्त प्रभु के साक्षात दर्शन की कामना करता है।

सांवरिया कर दो बेड़ा पार भजन का महत्व

यह भजन पूर्ण समर्पण और जीवन की अस्थिरता का प्रतीक है। यह भक्त को सिखाता है कि जीवन की नैया केवल प्रभु की कृपा से ही पार लग सकती है।

सांवरिया कर दो बेड़ा पार लोगों को क्यों जपना चाहिए

यह भजन मानसिक शांति देता है, कठिन समय में आशा जगाता है और भक्त को श्याम प्रभु की शरण में स्थिर रखता है।

सांवरिया कर दो बेड़ा पार कब जपना चाहिए

जब जीवन में संकट, भ्रम या निराशा हो, या जब भी मन प्रभु के दर्शन और कृपा की चाह रखे, तब इस भजन का जप अत्यंत फलदायी माना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारी अन्य वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री और हिंदू धर्म की मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य केवल भक्ति भाव और सामान्य जानकारी प्रदान करना है।

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