सांवरिया ले चल परली पार लिरिक्स, भावार्थ, सार और महत्व | Sanwariya Le Chal Parli Paar Lyrics in Hindi

सांवरिया ले चल परली पार भजन भक्त और भगवान के मधुर, आत्मीय और समर्पित संबंध को दर्शाता है। भक्त सांवरिया श्याम से विनती करता है कि उसे परली पार अर्थात आध्यात्मिक मुक्ति, प्रभु की शरण, और राधा रानी के दिव्य धाम तक पहुँचा दें। पूरा भजन समर्पण, प्रेम, थकावट, और प्रभु पर पूर्ण निर्भरता की गहन अनुभूति से भरा है। सांवरिया ले चल परली पार लिरिक्स, भावार्थ, सार और महत्व

सांवरिया ले चल परली पार लिरिक्स | Sanwariya Le Chal Parli Paar Lyrics in Hindi

सांवरिया ले चल परली पार,
जहां विराजे राधा रानी, मेरी अलबेली सरकार ।।

गुण अवगुण सब तेरे अर्पण,
पाप पुण्य सब तेरे अर्पण,
यह जीवन भी तेरे अर्पण,
मैं तेरे चरणों की दासी, मेरे प्राण आधार,
सांवरिया ले चल परली पार ।।

तेरी आस लगा बैठी हूं,
अखियां खूब थका बैठी हूं,
मैं अपना आप लुटा बैठी हूं,
सांवरिया मैं तेरी रागिनी, तू मेरा मल्हार,
सांवरिया ले चल परली पार ।।

तेरे बिन कोई चाह नहीं है,
जग की कुछ परवाह नहीं है,
कोई सुझती राह नहीं है,
मेरे प्रियतम मेरे मांझी, मेरा कर दो बेड़ा पार,
सांवरिया ले चल परली पार ।।

आनंद घन यहां बरस रहा है,
पत्ता पत्ता हर्ष रहा है,
हरि बेचारा तरस रहा है,
बहुत हुआ अब हार गई मैं, मेरा कर दो बेड़ा पार,
सांवरिया ले चल परली पार ।।

सांवरिया ले चल परली पार भजन का भावार्थ (Meaning & Interpretation in Hindi)

इस भजन में एक भक्त अपने सांवरिया श्याम से पूर्ण समर्पण के साथ प्रार्थना करता है।
वह कहती/कहता है कि—
मेरे गुण-दोष, पाप-पुण्य, सब कुछ तुम्हें अर्पित हैं।
मैं थक चुका/चुकी हूँ, अब तुम ही मुझे उस दिव्य धाम तक ले चलो, जहाँ राधा रानी विराजती हैं।
तुम ही मेरे जीवन के नाविक हो।

भक्त की यही पुकार है—
“मेरे सांवरिया, मेरे प्रभु, मुझे संसार-सागर से निकालकर मोक्ष, प्रेम और शरण की परली पार पहुँचा दो।”

यह भाव इंसान के अंदर की थकान, निस्वार्थ भक्ति, समर्पण और प्रभु पर पूर्ण निर्भरता को दर्शाता है।

सांवरिया ले चल परली पार भजन का सार (Essence of the Bhajan)

  • यह भजन पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

  • भक्त अपनी सारी शक्तियाँ, इच्छाएँ और कर्म श्याम के चरणों में समर्पित करता है।

  • इसमें जीवन की थकान और मुक्ति की लालसा का भाव है।

  • भजन बताता है कि प्रभु ही असली नाविक हैं, वही संसार-सागर से पार लगाते हैं।

सांवरिया ले चल परली पार भजन क्यों गाया जाता है?

  • यह भजन गाया जाता है—
  • जब मन प्रभु की शरण चाहता है
  • जब जीवन में थकान, भ्रम, दुख या संघर्ष हो
  • जब भक्त को लगे कि अब केवल प्रभु की कृपा ही रास्ता दिखा सकती है
  • जब आत्मा प्रभु से मिलन की इच्छा रखे
  • जब मन संसार से उपराम होकर दिव्यता की ओर बढ़ना चाहे

यह भजन श्याम बाबा की करुणा, दया और शरणागत भक्तों पर उनकी कृपा को स्मरण कराता है।

सांवरिया ले चल परली पार भजन कब गाया जाए?

यह भजन विशेष रूप से इन अवसरों पर गाया जाता है—
✔ सुबह-शाम के नित्य भजन संध्या में
✔ संकट, चिंता या मानसिक थकान के समय
✔ श्याम कीरतनों और जागरण में
✔ राधा-कृष्ण और श्याम बाबा के जन्मोत्सव पर
✔ व्यक्तिगत साधना, ध्यान या अकेले बैठकर भाव में डूबने के लिए
✔ यात्रा या कठिन समय में मन को स्थिर करने के लिए

कुल मिलाकर, यह भजन तब गाना सबसे पवित्र लगता है जब मन पूरी तरह प्रभु की गोद में समर्पित होना चाहता है

Sanwariya Le Chal Parli Paar Bhajan FAQs:

Q1. “परली पार” का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है “दूसरी ओर”, अर्थात मोक्ष, प्रभु का धाम, या राधा-श्याम की शरण

Q2. इस भजन में भक्त किससे प्रार्थना करता है?
उत्तर: सांवरिया श्याम से—जो श्रीकृष्ण का ही स्वरूप हैं।

Q3. यह भजन किस भाव में गाया जाता है?
उत्तर: समर्पण, भक्ति, करुणा, और प्रभु से मिलने की गहरी तड़प में।

Q4. क्या यह भजन श्याम भजन है या कृष्ण भजन?
उत्तर: यह एक श्याम भजन है, लेकिन इसमें राधा-कृष्ण भक्ति भी समाहित है।

Q5. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: “हे प्रभु! मुझे संसार की उलझनों से निकालकर अपनी शरण में ले चलो।” 

सांवरिया ले चल परली पार Video Song

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