थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति सच्चे प्रेम और आत्मीय भक्ति का एक सुंदर उदाहरण है। भक्तिन “जाटनी बेटी” अपनी भावनाओं में इतनी तल्लीन है कि वह स्वयं बाबा को खीचड़ो (राजस्थानी व्यंजन) खिलाने के भाव से यह गीत गाती है। इसमें सरल ग्रामीण भाषा में भक्ति की सच्चाई, समर्पण और प्रेम की गहराई झलकती है।
थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ लिरिक्स in Hindi
थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ, उपर घी की बाटकी,
जीमो म्हारा श्याम धणी, जिमावै बेटी जाट की ।।
बाबो म्हारो गांव गयो है, ना जाने कद आवैलो,
ऊके भरोसे बैठयो रहयो तो, भूखो ही रह जावैलो,
आज जिमाऊं तैने रे खीचड़ो, काल राबड़ी छाछ की,
जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाटी की ।।
बार-बार मंदिर ने जुड़ती, बार-बार में खोलती,
कइया कोइनी जीमे रे मोहन, करडी-2 बोलती,
तू जीमे जद मैं भी जिमूं, मानू ना कोई लाट की,
जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाटी की ।।
परदो भूल गई सांवरिया, परदो फेर लगायो जी,
धावलिये री औल बैठ कर, श्याम खीचड़ौ खायो जी,
भोला-भाला भगता सूं, सांवरिया कइंया आंट की,
जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाटी की ।।
भकित हो तो करमा जैसी सावरियों घर आवेलो,
सोहन लाल लोहाकार प्रभु का निरख निरख गुण गावेलो,
सांचो प्रेम प्रभु में होतो मूरत बोले काठ की,
जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाटी की ।।
थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ भजन का भावार्थ (Meaning in Hindi)
इस भजन में एक सच्ची भक्तिन का प्रेमपूर्ण भाव झलकता है, जो श्याम बाबा को अपने घर का अतिथि मानकर उन्हें स्नेहपूर्वक खीचड़ो (राजस्थानी खिचड़ी) खिलाने का भाव रखती है।
वह कहती है — “हे श्याम धणी! आज मैं अपने हाथों से बनी खीचड़ो और ऊपर घी डालकर आपको खिलाना चाहती हूँ।” यह भाव ममता, सेवा और आत्मीयता का प्रतीक है। भक्ति यहाँ औपचारिक नहीं, बल्कि दिल से निकली सच्ची भावना है, जो ईश्वर को घर का अपना सदस्य मानती है।
थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ भजन का सार (Summary)
यह भजन सिखाता है कि ईश्वर को प्रेमपूर्ण भाव सबसे प्रिय होता है। जब भक्ति में माँ का स्नेह, बहन की ममता और बेटी की श्रद्धा मिल जाती है, तो ईश्वर स्वयं भक्त के घर पधारते हैं। गीत में ग्रामीण संस्कृति, सादगी और सच्चे प्रेम की मिठास गूँजती है। “थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ” यह पंक्ति दर्शाती है कि सच्चे भाव से अर्पित किया गया छोटा सा भोजन भी भगवान को प्रिय होता है।
क्यों गाया जाता है यह भजन
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जब भक्त अपने मन में बाबा को घर बुलाने की भावना करता है।
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श्याम मंदिर या भजन संध्या में प्रेम भक्ति के भाव जगाने हेतु।
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विशेष रूप से ग्रामीण या पारिवारिक भजन कार्यक्रमों में, जहाँ श्याम बाबा की सरलता और प्रेमभाव का बखान किया जाता है।
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यह भजन उस भावना को दर्शाता है — “भगवान को दिखावे से नहीं, प्रेम से पाया जा सकता है।”
कब गाना चाहिए
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खाटू श्याम मंदिर या घर में भोग आरती या विशेष पूजा के समय।
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भजन संध्या, कीर्तन या सामूहिक सत्संग में।
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जब मन में बाबा को अपना अतिथि या परिवार का सदस्य मानने की भावना हो।
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विशेष अवसर: फाल्गुन मेला, जन्मोत्सव, या श्याम भोग दिवस।
FAQs – थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ भजन से जुड़े प्रश्न
Q1. यह भजन किस भाषा में रचा गया है?
यह भजन राजस्थानी भाषा में रचा गया है।
Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
सच्ची भक्ति वही है जिसमें प्रेम, सादगी और आत्मीयता हो।
Q3. क्या यह भजन केवल मंदिरों में ही गाया जा सकता है?
नहीं, इसे घर, सत्संग या परिवार के साथ भक्ति के समय भी गाया जा सकता है।
Q4. यह भजन किस भाव से गाना चाहिए?
माता या बेटी के स्नेहभाव से — जैसे भक्त अपने भगवान को प्रेम से खिलाना चाहता है।





















