यह अत्यंत भावुक और आत्मिक भजन “तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई” भक्त और श्री खाटू श्यामजी के बीच के उस अनकहे, गहरे और प्रेममय संवाद को दर्शाता है, जिसे केवल हृदय से अनुभव किया जा सकता है। इस भजन में कवि शिव चरण जी भीमराजका ने अपने समर्पण, भावनाओं और श्यामप्रेम की अद्भुत अभिव्यक्ति की है। यह भजन गाते समय भक्त का हृदय श्याम के चरणों में पूर्णतः समर्पित हो जाता है। उसकी आत्मा, आंसुओं के माध्यम से अपने प्रिय श्याम से संवाद करती है — और उस क्षण भक्त अनुभव करता है कि प्रेम ही सच्ची भक्ति का स्वरूप है।
तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई लिरिक्स
तुम्हारी मेरी बात, के जाणेगो कोई,
है कितनी दफाईं, ये पलकां भिगोई ।।
तर्ज – गरीबो की सुनो ।
जितना भी तेरी याद का आंसू, मेरे खातिर दिवाली,
मैं एक वन का फूल हूँ माधव, तू ही तू इसका माली,
दया से तुम्हारी ये, फूला फला है,
कलाकार की ये, निराली कला है,
मैं गुणगान गाऊँ, उतने ही कम है,
मेरी कुछ ना हस्ती, तुम्हें ही शरम है,
अणजाणे ही तेरी याद मं, कितनी राताँ खोई ।।
मुझमें कोई इल्म नहीं है, तेरी प्रीत निभाने का,
अक्कल काम नहीं करती है, देख के हाल जमाने का,
किधर से किधर, आदमी जा रहा है,
नजर ना कोई, रास्ता आ रहा है,
दिलाते तुम्हें याद, मैं आ रहा हूँ,
इशारे पे तेरे, चले जा रहा हूँ,
सर आंख्यां पर हुक्म तिहारो, तू करसी सो होई ।।
तेरी मेरी प्रीत के मांई, तीजो कोई पंच नहीं,
तेरी पूजा अर्चन का है, मन मंदिर सा मंच नहीं,
तेरा नाम लेकर, जीये जा रहा हूं,
ये बेजोड़ हाला, पिये जा रह हूं,
मेरी जिन्दगी तेरी, बांकी अदा है,
ये ‘शिव’ तो दीवाना, तुम्हीं पे फिदा है,
श्याम बहादुर उड़ता हंसा, देख जगत क्यूँ रोई ।।
लिरिक्स – शिव चरण जी भीमराजका
भजन का भाव
“तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई” — यह पंक्ति स्वयं में भक्ति का रहस्य समेटे हुए है। यह बताती है कि श्याम और भक्त के बीच जो प्रेम का बंधन है, वह अनकहा और केवल हृदय में महसूस किया जा सकता है।
आंसुओं में भक्ति का बहाव — कवि कहता है कि प्रभु की याद में बहते ये आंसू दीपावली के दीप समान हैं, जो जीवन के अंधकार को आलोकित करते हैं। वह स्वयं को एक वन के फूल के रूप में देखता है, जिसका माली स्वयं श्री श्याम हैं।
समर्पण और स्वीकृति — भजन में भक्त कहता है कि उसमें कोई विशेष विद्या या योग्यता नहीं, केवल श्याम की कृपा ही उसका आधार है। वह उनके इशारे पर चलने वाला एक बालक है, जो हर परिस्थिति में उन्हीं का नाम जपता है।
अद्वितीय भक्ति का बंधन — यह भजन दर्शाता है कि श्यामभक्ति में कोई नियम, मंच या सीमा नहीं — यह तो हृदय की पुकार है, जो प्रेम के रस से भरी हुई है।
क्यों गाया जाता है यह भजन
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श्यामप्रेम और आत्मिक समर्पण को अनुभव करने के लिए।
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यह भजन उस गहरे भाव को जगाता है जब भक्त अपने आराध्य से मौन संवाद करता है।
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मन के विकारों को शुद्ध कर प्रेम और भक्ति का भाव प्रकट करने के लिए।
कब गाएं
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भजन संध्या या खाटू श्यामजी की आरती से पूर्व।
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जब मन अत्यंत भावुक या एकांत भक्ति में लीन हो।
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व्यक्तिगत साधना या ध्यान के समय, विशेषकर जब हृदय श्याम की याद से भीगा हो।
संक्षिप्त भावार्थ
“हे मेरे श्याम! हमारे बीच का प्रेम केवल तुम और मैं जानते हैं। मेरी हर सांस, हर आंसू और हर पुकार तुम्हारे लिए है। मैं अज्ञानी, तुच्छ और अपूर्ण हूँ, पर तुम्हारी कृपा से ही यह जीवन खिल उठा है। तुम मेरे माली हो, मैं तुम्हारा फूल — और यही मेरा सौभाग्य है।”





















