ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास लिरिक्स (Aisi kripa karo shree radhe dijo vrindavan ko was lyrics in hindi)
यह अत्यंत भावपूर्ण भजन “एसी किरपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास” भगवान श्री राधारानी और श्री श्याम (कृष्ण) की कृपा और वृन्दावन में निवास की अभिलाषा का गहन वर्णन करता है। इसमें भक्त अपनी समर्पित प्रार्थना के माध्यम से राधा-कृष्ण के चरणों में जीवन व्यतीत करने की इच्छा व्यक्त करता है। यह भजन गाते समय भक्त का हृदय राधा-कृष्ण के प्रेम, कृपा और वृन्दावन के दिव्य वातावरण में पूरी तरह विलीन हो जाता है।
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास लिरिक्स In Hindi
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास,
वृन्दावन को वास, दीजो हरी भक्तन को साथ ।।
भूख लगे तो मांगन जाऊ,
ब्रजवासिन के टुकड़े पाऊ,
प्यास लगे यमुना जल पीके, निधिवन करू निवास,
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास ।।
गोर्वन्धन परिक्रमा लगाऊ,
मानसी गंगा प्रेम से नहाऊ,
राधा कुंड और श्याम कुंड में, नित्य करू स्नान,
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास ।।
नंद गाव बरसाने जाऊं,
गोवर वन परिक्रमा लगाऊ,
दान कुटी और मोर कुटी पे, देखू रास विलास,
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास ।।
नन्द बाबा के द्वारे जाऊ,
बलदाऊ जी के दर्शन पाऊ,
बांके बिहारी जी के दर्शन करके, जनम सफल होई जाये,
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास ।।
वृन्दावन परिक्रमा जाऊ,
यमुना जी में रोज नहाऊ,
राधा वल्लभ करू मंगला, बिहारी जी श्रृंगार,
ऐसी कृपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास ।।
भजन का भाव
भजन में वृन्दावन, गोवर्धन, यमुना, राधा कुंड और श्याम कुंड जैसे पवित्र स्थलों का जिक्र है, जो भक्त के मन में आध्यात्मिक आनंद और भक्ति की भावना जगाते हैं।
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“एसी किरपा करो श्री राधे, दीजो वृन्दावन को वास” — भक्त श्री राधा से यह प्रार्थना करता है कि वह वृन्दावन में रहने का अवसर दें और सभी हरी भक्तों के साथ वहां निवास करने की कृपा करें।
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भोजन और जल की व्यवस्था का वर्णन — भक्त कहता है कि भूख लगे तो ब्रजवासियों से भोजन प्राप्त हो, प्यास लगे तो यमुना जल पीकर निवास संभव हो।
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परिक्रमा और दर्शन का महत्व — गोवर्धन, नंदगांव, बलदेव जी और बांके बिहारी जी के दर्शन करने से जीवन सफल और पुण्यदायक होता है।
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श्रृंगार और पूजा — राधा-कृष्ण के श्रृंगार और पूजा द्वारा भक्त का मन और हृदय पूर्णत: आनंदित हो जाता है।
क्यों गाया जाता है यह भजन
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वृन्दावन में निवास की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना के लिए।
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श्री राधा-श्याम की भक्ति और आराधना में भाव भक्ति जगाने के लिए।
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भक्त के हृदय में प्रेम, श्रद्धा और आध्यात्मिक आनंद का संचार करने के लिए।
🎵 कब गाएं
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वृन्दावन यात्राओं, मुरली उत्सव या रासलीला उत्सवों में।
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मंदिरों में भजन संध्या या व्यक्तिगत साधना के समय।
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जब भक्त अपने जीवन को पूर्णतः राधा-श्याम के चरणों में समर्पित करना चाहता हो।
संक्षिप्त भावार्थ
“हे श्री राधे! आप कृपा करके हमें वृन्दावन में निवास करने का अवसर दें। हमें भूख-प्यास, दर्शन और परिक्रमा की सुविधा प्रदान करें। हमें आपका श्रृंगार और भक्ति का अनुभव कराएं। आपके चरणों में निवास करने से ही हमारा जीवन पूर्ण और मंगलमय होगा।”


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