×

राधे बोलो तो सही – श्याम की होली का मधुर भजन हिंदी लिरिक्स

राधे बोलो तो सही – श्याम की होली का मधुर भजन हिंदी लिरिक्स

राधे बोलो तो सही: यह भजन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पवित्र प्रेम और होली के रंगों का अद्भुत संगम है। इस भजन में श्री कृष्ण राधा रानी से फागुन में होली खेलने का आग्रह करते हैं और कहते हैं कि यदि वे होली नहीं खेलेंगी तो वे बिंदिया, गुलाल, काजल, चुनरी और पायल बनकर उनके श्रृंगार का हिस्सा बन जाएंगे। यह भजन भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है और होली के पावन पर्व पर विशेष रूप से गाया जाता है। इस भजन की मधुर धुन और सरल शब्द श्रद्धालुओं के मन में राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की अनुभूति कराते हैं और भक्ति रस में डुबो देते हैं।

विवरण जानकारी
भजन शीर्षक राधे बोलो तो सही
भजन लेखक पारंपरिक कृष्ण भजन
अन्य भजन खोजें @bhajan.network

राधे बोलो तो सही भजन लिरिक्स

🌸 राधे बोलो तो सही श्याम बोलो तो सही 🌸

राधे बोलो तो सही श्याम बोलो तो सही बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं

🔴 होली नहीं खेलोगे तो बिंदिया बन जाऊंगा बिंदिया बन जाऊंगा माथे पर लग जाऊंगा बोलो तो सही राधे बोलो तो सही

🎨 बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं होली नहीं खेलोगे तो गुलाल बन जाऊंगा गुलाल बन जाऊंगा गालों में लग जाऊंगा बोलो तो सही राधे बोलो तो सही

👁️ बोल फागुन में होली खेलोगे नहीं होली नहीं खेलोगे तो काजल बन जाऊंगा काजल बन जाऊंगा नैनों में लग जाऊंगा बोलो तो सही राधे बोलो तो सही

🧣 बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं होली नहीं खेलेगी तो चुनरी बन जाऊंगा चुनरी बन जाऊंगा अंगों से लिपट जाऊंगा बोलो तो सही राधे बोलो तो सही

👣 बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं होली नहीं खेलोगे तो पायल बन जाऊंगा पायल बन जाऊंगा पैरों में लग जाऊंगा बोलो तो सही राधे बोलो तो सही

🌺 बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं 🌺

राधे बोलो तो सही भजन का अर्थ

राधे बोलो तो सही श्याम बोलो तो सही – इस पंक्ति में श्री कृष्ण राधा रानी से कह रहे हैं कि हे राधे कुछ तो बोलो, हे श्याम सुंदरी कुछ तो कहो। यह पंक्ति प्रेम और आग्रह की भावना को दर्शाती है।

बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं – श्री कृष्ण पूछ रहे हैं कि क्या तुम फागुन के महीने में मेरे साथ होली नहीं खेलोगी। यह पंक्ति होली के त्योहार और राधा-कृष्ण की लीलाओं का संकेत है।

होली नहीं खेलोगे तो बिंदिया बन जाऊंगा, बिंदिया बन जाऊंगा माथे पर लग जाऊंगा – यहां कृष्ण कहते हैं कि यदि तुम मेरे साथ होली नहीं खेलोगी तो मैं बिंदी बनकर तुम्हारे माथे पर सजा रहूंगा। यह पंक्ति कृष्ण के असीम प्रेम और राधा के साथ हमेशा रहने की इच्छा को दर्शाती है।

होली नहीं खेलोगे तो गुलाल बन जाऊंगा, गुलाल बन जाऊंगा गालों में लग जाऊंगा – श्री कृष्ण आगे कहते हैं कि मैं गुलाल बनकर तुम्हारे कोमल गालों पर रंग बनकर सज जाऊंगा। यह होली के रंगों और प्रेम के रंग दोनों का प्रतीक है।

होली नहीं खेलोगे तो काजल बन जाऊंगा, काजल बन जाऊंगा नैनों में लग जाऊंगा – कृष्ण कहते हैं कि मैं काजल बनकर तुम्हारी सुंदर आंखों में समा जाऊंगा। यह पंक्ति नयन सुख और दर्शन की महत्ता को बताती है।

होली नहीं खेलेगी तो चुनरी बन जाऊंगा, चुनरी बन जाऊंगा अंगों से लिपट जाऊंगा – यहां श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं चुनरी बनकर तुम्हारे अंग-अंग से लिपटा रहूंगा। यह पंक्ति आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

होली नहीं खेलोगे तो पायल बन जाऊंगा, पायल बन जाऊंगा पैरों में लग जाऊंगा – अंतिम पंक्ति में कृष्ण कहते हैं कि मैं पायल बनकर तुम्हारे चरणों में रहूंगा और तुम्हारे हर कदम पर मधुर स्वर बिखेरूंगा। यह भगवान की विनम्रता और भक्त के प्रति प्रेम को दर्शाता है।

राधे बोलो तो सही भजन का महत्व

यह भजन हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं का अद्भुत वर्णन करता है और भक्तों को दिव्य प्रेम का अनुभव कराता है। इस भजन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक गहरा है क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पवित्र प्रेम को दर्शाता है। होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं है बल्कि यह राधा-कृष्ण की रास लीला और वृंदावन की होली का स्मरण कराता है। यह भजन भक्तों को सिखाता है कि भगवान हमारे जीवन के हर पहलू में मौजूद रहना चाहते हैं चाहे वह बिंदी हो, गुलाल हो, काजल हो, चुनरी हो या पायल। इस भजन को गाने या सुनने से मन में भक्ति भाव जागृत होता है और राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना बढ़ती है। यह भजन यह भी संदेश देता है कि ईश्वर हमारे जीवन के हर क्षण में हमारे साथ रहना चाहते हैं और हमसे अटूट प्रेम करते हैं।

राधे बोलो तो सही भजन का जाप क्यों करना चाहिए

भक्तों को इस भजन का जाप इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह भजन राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम है। जब हम इस भजन को गाते या सुनते हैं तो हमारा मन वृंदावन की पावन धरती और राधा-कृष्ण की लीलाओं में लीन हो जाता है। यह भजन हमारे मन से नकारात्मक विचारों को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। होली के समय इस भजन का विशेष महत्व है क्योंकि यह हमें प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। इस भजन का नियमित जाप करने से भक्तों के जीवन में खुशहाली आती है और मानसिक शांति मिलती है। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान हमारे जीवन के हर छोटे-बड़े हिस्से में उपस्थित रहना चाहते हैं। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से भक्ति भाव में वृद्धि होती है और भगवान के प्रति हमारा प्रेम गहरा होता जाता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी है जो राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन होना चाहते हैं।

राधे बोलो तो सही भजन का जाप कब करना चाहिए

इस पवित्र भजन का जाप विशेष रूप से होली के त्योहार के समय करना अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। फागुन महीने में जब होली का पर्व नजदीक आता है तो इस भजन को गाने का विशेष महत्व है क्योंकि यह भजन होली और राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में इस भजन का जाप करने से मन में दिव्य शांति और आनंद की अनुभूति होती है। सायंकाल के समय जब आरती या पूजा करते हैं तब भी इस भजन को गाया जा सकता है। राधा अष्टमी, जन्माष्टमी और अन्य कृष्ण से जुड़े त्योहारों पर भी इस भजन का गायन विशेष फलदायी होता है। वृंदावन और मथुरा की यात्रा के दौरान इस भजन को गाने से विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। जब भी मन उदास हो या किसी समस्या से परेशान हों तब भी इस भजन को गाकर या सुनकर मानसिक शांति पाई जा सकती है। भक्त अपनी दैनिक पूजा-आराधना में भी इस भजन को शामिल कर सकते हैं। सत्संग और भजन-कीर्तन के कार्यक्रमों में भी इस भजन का गायन अत्यधिक लोकप्रिय है।

अस्वीकरण: इस ब्लॉग पोस्ट में दी गई सभी जानकारी विभिन्न वेबसाइटों, धार्मिक पुस्तकों और हिंदू धर्म की मान्यताओं के आधार पर संकलित की गई है। यह भजन लोक परंपरा का हिस्सा है और पीढ़ी दर पीढ़ी भक्तों द्वारा गाया जाता रहा है। भजन के अर्थ, महत्व और लाभ हिंदू धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक ग्रंथों पर आधारित हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को केवल धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के रूप में लें। किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। अधिक प्रामाणिक जानकारी के लिए कृपया धार्मिक गुरुओं या विद्वानों से परामर्श लें। यह भजन केवल भक्ति भाव से गाया जाना चाहिए और इसका उद्देश्य राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण को बढ़ाना है।

Post Comment

Read More Bhajan Lyrics